शाहजहांपुर में नगर निगम के पार्षदों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसमें वे कथित तौर पर अवैध कमीशन आपस में बांटने की शपथ लेते दिख रहे हैं। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
शाहजहांपुर नगर निगम के पार्षदों का एक विवादित वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। इस वीडियो में पार्षद गंगा जल हाथ में लेकर कथित रूप से यह कसम खाते हुए दिखाई दे रहे हैं कि वे रिश्वत और अवैध कमीशन की कमाई को आपस में मिल-बांटकर इस्तेमाल करेंगे। इतना ही नहीं, वीडियो में वे एक-दूसरे को बचाने और किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई के समय एकजुट रहने की भी शपथ लेते दिख रहे हैं।
प्रशासन का रुख
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) सौम्या गुरुरानी ने इस पर संज्ञान लिया है। प्रशासन का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह वीडियो पुराना लग रहा है, जो संभवतः नवंबर 2025 के आसपास का हो सकता है। फिलहाल, टीम इस वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है और इसमें दिखाई दे रहे चेहरों की पहचान की जा रही है।
पारदर्शिता पर उठे सवाल
इस घटना ने स्थानीय निकाय की कार्यप्रणाली और गवर्नेंस पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग और राजनीतिक दल अब मामले की उच्च-स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं ताकि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का सच सामने आ सके। जब तक जांच रिपोर्ट पूरी नहीं हो जाती, तब तक वीडियो की प्रमाणिकता को लेकर कोई भी अंतिम टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी, लेकिन दोषी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।
