Shadowfax Block Deal: निवेशकों की ₹1,047 करोड़ की हिस्सेदारी बिक्री!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Shadowfax Block Deal: निवेशकों की ₹1,047 करोड़ की हिस्सेदारी बिक्री!

Shadowfax Technologies में निवेशकों की बड़ी हिस्सेदारी बिकने वाली है। Flipkart और Eight Roads जैसे पुराने निवेशक **9.08%** हिस्सेदारी **₹1,047 करोड़** में बेच रहे हैं। शेयर ₹197 प्रति शेयर के भाव पर ऑफर किए गए हैं, जो पिछले क्लोजिंग प्राइस से **9.9%** कम है। यह एक सेकेंडरी सेल है, यानी पैसा कंपनी को नहीं, बल्कि बेचने वाले निवेशकों को मिलेगा।

Detailed Coverage

Shadowfax में बड़ी शेयर बिकवाली!

लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सर्विस देने वाली कंपनी Shadowfax Technologies के शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। शुक्रवार को, कंपनी के शुरुआती निवेशकों की एक टोली, जिसमें Eight Roads Investments Mauritius II, Flipkart Internet, और IMM India Fund शामिल हैं, अपनी 9.08% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है। इस डील का कुल मूल्य लगभग ₹1,047.5 करोड़ आंका गया है।

डील की कीमत और स्ट्रक्चर

इस ब्लॉक डील के लिए फ्लोर प्राइस ₹197 प्रति शेयर रखा गया है। यह कीमत 23 जुलाई को कंपनी के क्लोजिंग प्राइस ₹218.58 से करीब 9.9% कम है। डिस्काउंट पर कीमत रखकर, बेचने वाले शेयरहोल्डर इंस्टीट्यूशनल बायर्स को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस सेल को Kotak Securities और Morgan Stanley India जैसे इन्वेस्टमेंट बैंक्स मैनेज कर रहे हैं।

कंपनी की फाइनेंस पर असर?

निवेशकों के लिए यह जानना ज़रूरी है कि यह एक सेकेंडरी सेल है। इसका मतलब है कि इस बिक्री से होने वाली सारी कमाई सीधे बेचने वाले एंटिटीज - Eight Roads, Flipkart, और IMM India Fund - को मिलेगी। Shadowfax Technologies को इसमें से कोई भी पैसा नहीं मिलेगा। नतीजतन, कंपनी की बैलेंस शीट, कैश रिजर्व, या विस्तार योजनाओं पर इस डील का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।

सेकेंडरी शेयर सेल को समझना

टेक्नोलॉजी और लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप्स के सफर में सेकेंडरी सेल आम बात है। कंपनी के शुरुआती दौर में साथ देने के बाद, अर्ली इन्वेस्टर्स अक्सर अपने निवेश पर रिटर्न पाने के लिए अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं। हालांकि, इन डील्स से नए निवेशकों को कंपनी में एक तय कीमत पर एंट्री मिलती है, लेकिन कंपनी को कोई नया ग्रोथ कैपिटल नहीं मिलता। निवेशकों को शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर में बदलाव और नए शेयरहोल्डर्स के आने से कंपनी के गवर्नेंस या भविष्य की स्ट्रैटेजिक डीसीजन पर पड़ने वाले असर पर नज़र रखनी चाहिए।

बाजार पर्यवेक्षकों के लिए अगले कदम यह देखना होगा कि क्या यह 9.08% हिस्सेदारी ऑफर प्राइस पर पूरी तरह से बिक पाती है, और साथ ही कंपनी की ओर से प्रमोटर या इन्वेस्टर कंपोजिशन में बदलाव को लेकर भविष्य में आने वाली फाइलिंग्स पर भी नज़र रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.