दुनिया की दिग्गज वेंचर कैपिटल फर्म Sequoia Capital अब अपने ग्लोबल विस्तार को समेट रही है। कंपनी लंदन ऑफिस बंद करने के साथ-साथ अपने 'Arc' और 'Scouts' प्रोग्राम को भी खत्म कर रही है, ताकि पूरा फोकस सिर्फ US ऑपरेशन्स पर रहे।
दुनिया की सबसे बड़ी वेंचर कैपिटल फर्मों में शुमार Sequoia Capital एक बड़े रीस्ट्रक्चरिंग के दौर से गुजर रही है। कंपनी ने ऐलान किया है कि वह 2020 में शुरू हुए अपने लंदन ऑफिस को बंद कर रही है। इसके साथ ही, फर्म ने अपने दो प्रमुख स्टार्टअप सपोर्ट प्रोग्राम—'Arc' और 'Scouts'—को भी बंद करने का फैसला किया है। इस रणनीतिक बदलाव को कंपनी 'The Sequoia of Tomorrow' नाम दे रही है, जिसका उद्देश्य फर्म को उसके सिलिकॉन वैली (Silicon Valley) वाले मूल स्वरूप में वापस लाना है।\n\n### संगठनात्मक ढांचे में बदलाव\nफर्म अब अपने अर्ली-स्टेज और ग्रोथ इन्वेस्टमेंट टीम को एक साथ मिला रही है। मैनेजमेंट स्ट्रक्चर को सरल बनाया जा रहा है, जिससे फैसले लेने की प्रक्रिया तेज होगी। कंपनी ने अपनी पारंपरिक सोमवार की पार्टनर मीटिंग्स को भी खत्म करने का निर्णय लिया है, ताकि अब पूरा ध्यान फाउंडर्स पर केंद्रित रहे।\n\n### भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम पर क्या असर?\nहालांकि Sequoia एक प्राइवेट फर्म है और भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है, लेकिन इसका हर कदम स्टार्टअप जगत पर असर डालता है। याद दिला दें कि 2023 में ही कंपनी ने अपने चीन और भारत/दक्षिण-पूर्व एशिया के कारोबार को अलग कर दिया था, जो अब क्रमशः HongShan और Peak XV Partners के नाम से जाने जाते हैं।\n\n### रिस्क और नई रणनीति\nइस कंसोलिडेशन से जुड़े कुछ बड़े जोखिम भी हैं। विदेशी बाजारों में अपनी उपस्थिति कम करने से कंपनी को ग्लोबल लेवल पर नए स्टार्टअप्स की पहचान करने में चुनौती आ सकती है। हालांकि, फर्म ने हाल ही में लगभग $10 बिलियन की नई पूंजी जुटाई है। अब कंपनी का पूरा ध्यान 'हाई-कनविक्शन' निवेश पर है, यानी कम डील करना लेकिन बड़े और ठोस सेक्टर जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बायोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी में बड़ा दांव लगाना। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह नया लीनर मॉडल बिना ग्लोबल नेटवर्क के भी शानदार रिटर्न देने में कामयाब रहता है या नहीं।
