भारतीय शेयर बाज़ारों ने अपनी चार हफ़्ते की लगातार बढ़त का सिलसिला खो दिया। हफ़्ते के बीच में आई ग्लोबल टेंशन और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते बाज़ार में वोलेटिलिटी (Volatility) दिखी, लेकिन Reliance Industries और Tata Consultancy Services (TCS) के शानदार नतीजों ने हफ़्ते के आख़िरी दिन बाज़ार को संभाला। अब निवेशकों की नज़रें बाकी कंपनियों के नतीजों और भू-राजनीतिक (Geopolitical) हालातों पर रहेंगी।
बाज़ार की वोलेटाइल चाल, पर हफ़्ते का अंत तेज़ी के साथ
10 जुलाई 2026 को ख़त्म हुए हफ़्ते में भारतीय शेयर बाज़ारों (Indian Stock Market) ने काफी उतार-चढ़ाव देखा। इस हफ़्ते की शुरुआत में दोनों प्रमुख इंडेक्स, सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty), 10 हफ़्ते की नई ऊंचाई पर पहुंचे थे, लेकिन हफ़्ते के बीच में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी ने बाज़ार की चाल पर ब्रेक लगा दिया। इसके चलते पिछले तीन महीनों में बाज़ार में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, हफ़्ते के आख़िरी दिन रिकवरी (Recovery) देखने को मिली, जिससे बाज़ार कुछ संभला।
Reliance और बैंकिंग स्टॉक्स का दम
शुक्रवार को सेंसेक्स 828 अंकों यानी 1.08% की तेज़ी के साथ 77,569 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 244 अंक चढ़कर 24,207 पर पहुंचा। इस तेज़ी के बावजूद, पूरे हफ़्ते के लिहाज़ से दोनों इंडेक्स क़रीब 0.3% नीचे बंद हुए। Reliance Industries के शेयर में 2.3% की उछाल ने शुक्रवार को बाज़ार को सहारा दिया। इसके अलावा, ICICI Bank में 1.4% और HDFC Bank में 0.8% की बढ़त ने भी इंडेक्स को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई।
TCS के नतीजों से IT सेक्टर में ख़ुशी
इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर के लिए हफ़्ता काफ़ी सकारात्मक रहा, खासकर Tata Consultancy Services (TCS) के पहली तिमाही के नतीजों के बाद। शुक्रवार को Nifty IT इंडेक्स 1.96% चढ़ा। TCS ने पहली तिमाही (Q1FY27) में ₹13,349 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹12,760 करोड़ के मुनाफ़े से 4.6% ज़्यादा है। यह नतीजे एनालिस्ट्स (Analysts) की उम्मीदों से बेहतर थे, जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद IT सेक्टर की मज़बूती को दिखाते हैं।
आगे क्या?
हफ़्ते के दौरान बाज़ार में 2,809 शेयरों में तेज़ी देखी गई, जबकि 1,462 शेयरों में गिरावट आई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹2,604 करोड़ की नेट खरीदारी की, और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी ₹2,020 करोड़ के शेयर खरीदे। अब बाज़ार की नज़रें अर्निंग सीज़न (Earnings Season) पर टिकी हैं, और निवेशक आगे आने वाले कॉर्पोरेट नतीजों पर बारीकी से नज़र रखेंगे। पश्चिमी एशिया (West Asia) के भू-राजनीतिक हालात कच्चे तेल की कीमतों और बाज़ार के सेंटीमेंट (Sentiment) पर असर डाल सकते हैं। टेक्निकल (Technical) तौर पर, निफ्टी के लिए 24,350-24,400 का लेवल अहम रेजिस्टेंस (Resistance) ज़ोन है, जबकि 24,000-24,050 के स्तर सपोर्ट (Support) का काम कर सकते हैं।
