सेंसेक्स-निफ्टी में शानदार वापसी: गिरावट के बाद वैल्यू बाइंग से बाजार में लौटी रौनक

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AuthorAditya Rao|Published at:
सेंसेक्स-निफ्टी में शानदार वापसी: गिरावट के बाद वैल्यू बाइंग से बाजार में लौटी रौनक

शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजारों ने दिन की गिरावट से उबरते हुए वापसी की। पांच दिनों की लगातार गिरावट के बाद निवेशकों ने शेयरों की खरीदारी की, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी अपने निचले स्तरों से ऊपर आ गए। बैंकिंग सेक्टर में रिकवरी और मजबूत होते रुपये ने इसे सहारा दिया।

Detailed Coverage

बाजार में दिखी जोरदार रिकवरी

शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजारों ने उतार-चढ़ाव भरे सत्र में दमदार वापसी की। शुरुआती गिरावट, जिसमें निफ्टी 23,600 के स्तर तक नीचे चला गया था, के बाद बाजार में खरीदारी का जोर बढ़ा। दोपहर तक, सेंसेक्स और निफ्टी अपनी अधिकांश शुरुआती गिरावट को पाट चुके थे, जो निवेशकों की बदली हुई भावना को दर्शाता है।

बैंकिंग सेक्टर और करेंसी का सहारा

बाजार को सहारा देने में वित्तीय शेयरों (Financial Stocks) ने अहम भूमिका निभाई। बैंक निफ्टी (Bank Nifty) अपने दिन के निचले स्तर से करीब 750 अंक सुधरा। इस सेक्टर में, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) के शेयरों में 1% से अधिक की तेजी देखी गई। इस बीच, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 96.51 पर कारोबार कर रहा था।

यह मजबूती ऐसे समय में आई है जब कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए आर्थिक दबाव पैदा कर सकता है। रुपये की चाल निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है।

पिछला प्रदर्शन और अहम स्तर

आज की रिकवरी से पहले, सेंसेक्स और निफ्टी लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट झेल रहे थे, और इस हफ्ते अब तक 3% तक की गिरावट दर्ज कर चुके थे। इस बिकवाली के माहौल के बीच, निवेशकों ने साइंट (Cyient) और सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक (Suryoday Small Finance Bank) जैसे शेयरों में वैल्यू देखी, जिनके तिमाही नतीजों के बाद शेयर चढ़े।

तकनीकी तौर पर, निफ्टी का 23,600 का स्तर आज एक महत्वपूर्ण सपोर्ट (Support) का काम कर रहा था। बाजार विश्लेषक इस बात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं कि क्या सूचकांक आने वाले सत्रों में इन स्तरों को बनाए रख पाते हैं या नहीं। इस कंसॉलिडेशन रेंज से नीचे एक बड़ी गिरावट और दबाव का संकेत दे सकती है, जबकि एक स्थायी रिकवरी व्यापक बाजार की स्थिरता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की गतिविधि पर निर्भर करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.