भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को एक महीने की सबसे बड़ी बढ़त दर्ज की। BSE Sensex **965** अंक चढ़कर **78,152** पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty **262** अंक की मजबूती के साथ **24,334** पर थमा। यह रिकवरी भारी-भरकम शेयरों और ग्लोबल सेंटीमेंट से प्रेरित थी, लेकिन मार्केट की चाल अभी भी थोड़ी सतर्क दिखी।
हैवीवेट स्टॉक्स ने खींचा बाजार!
मार्केट की इस रिकवरी में सबसे बड़ा योगदान लार्ज-कैप स्टॉक्स का रहा। Reliance Industries के शेयर 2.6% उछले, क्योंकि कंपनी के प्रमोटर ग्रुप ने जून के अंत तक अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 50.48% कर ली है। HDFC Bank ने भी 1.4% की तेजी के साथ बेंचमार्क इंडेक्स को सहारा दिया। हालांकि, इंडेक्स में तेजी के बावजूद, एडवांस (बढ़ने वाले) शेयरों की तुलना में गिरने वाले शेयरों की संख्या ज्यादा रही, जो मार्केट की अंदरूनी कमजोरी की ओर इशारा करता है।
नतीजों और सेक्टर्स का जलवा
फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया, Nifty Financial Services इंडेक्स 1.3% चढ़ा। Jio Financial Services ने जून तिमाही में 156% की जबरदस्त ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ के साथ ₹830 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। इस खबर के बाद, शेयर 3.1% मजबूत हुआ। अमेरिका से आए महंगाई के नरम आंकड़ों ने टेक्नोलॉजी शेयरों को भी सहारा दिया, जिससे ग्लोबल सेंट्रल बैंक्स द्वारा इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की चिंताएं कम हुईं।
ग्लोबल संकेत और आगे का जोखिम
निवेशकों का सेंटिमेंट मुख्य रूप से पॉजिटिव ग्लोबल संकेतों से बढ़ा, खासकर अमेरिका में महंगाई कम होने की उम्मीदों से। हालांकि, कुछ बाहरी दबाव बने हुए हैं। वेस्ट एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 1.14% बढ़कर $85.5 प्रति बैरल पर पहुंच गईं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के इंपोर्ट बिल को बढ़ा सकती हैं और रुपये पर दबाव डाल सकती हैं। शुक्रवार को सेंटिमेंट सुधरा, लेकिन BSE लिस्टेड फर्म्स की वीकली मार्केट कैप में ₹83,000 करोड़ की गिरावट देखी गई, जो पहले की वोलैटिलिटी का असर दिखाता है।
आगे चलकर, मार्केट पार्टिसिपेंट्स Nifty पर 24,500 से 24,550 के लेवल पर नजर रखेंगे, जो एक अहम रेजिस्टेंस जोन है। इस जोन के ऊपर टिके रहना अगले ट्रेंड की दिशा तय कर सकता है, जबकि सपोर्ट लेवल 24,150 से 24,200 के आसपास है। आने वाले हफ्तों में सबसे महत्वपूर्ण होगा कॉरपोरेट अर्निंग्स का सीजन, जो विभिन्न सेक्टर्स में डिमांड और मार्जिन स्टेबिलिटी के स्पष्ट संकेत देगा।
