Sensex, Nifty 1% से ज्यादा गिरे, मेटल स्टॉक्स में भारी बिकवाली

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AuthorNeha Patil|Published at:
Sensex, Nifty 1% से ज्यादा गिरे, मेटल स्टॉक्स में भारी बिकवाली

23 जून 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट आई। सेंसेक्स **893** अंक और निफ्टी **278** अंक नीचे बंद हुए। एशियाई बाजारों में टेक शेयरों की बिकवाली और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बढ़ती चिंता के कारण वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की प्रवृत्ति हावी रही। आईटी और मेटल सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली, हालांकि फार्मा सेक्टर ने कुछ सहारा दिया।

क्या हुआ?

23 जून 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। BSE सेंसेक्स 893.39 अंकों यानी 1.16% की गिरावट के साथ 76,200.68 पर बंद हुआ। वहीं, NSE निफ्टी 50 भी 278.80 अंक या 1.16% की कमजोरी के साथ 23,824.10 पर समाप्त हुआ। बाज़ार में व्यापक बिकवाली का असर दिखा, जहाँ ज़्यादातर सेक्टर इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए और दो-तिहाई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर की कीमतों में गिरावट आई, जिससे निवेशकों में सावधानी का माहौल दिखा।

ग्लोबल सेंटीमेंट क्यों बिगड़ा?

भारतीय बाज़ारों में यह गिरावट मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों से मिले नकारात्मक संकेतों की प्रतिक्रिया थी। खासकर, एशियाई इक्विटी बाज़ारों, विशेष रूप से दक्षिण कोरिया में भारी बिकवाली ने सेंटीमेंट को काफी प्रभावित किया। दक्षिण कोरियाई KOSPI इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई, जिसके कारण बाज़ार-व्यापी सर्किट ब्रेकर लगाने पड़े। वैश्विक स्तर पर इस 'रिस्क-ऑफ' माहौल को अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बढ़ती चिंताओं ने और गहरा कर दिया। निवेशकों को यह डर सता रहा है कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण फेडरल रिज़र्व ब्याज दरों को ऊंची बनाए रख सकता है, जिससे वैश्विक लिक्विडिटी और निवेश प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

सेक्टर पर असर: आईटी और मेटल स्टॉक्स दबाव में

बिकवाली का दबाव मुख्य रूप से उन सेक्टर्स पर रहा जो वैश्विक रुझानों और आर्थिक चक्रों के प्रति संवेदनशील हैं। Nifty मेटल इंडेक्स सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में औद्योगिक मांग में कमजोरी की उम्मीदों और वैश्विक कमोडिटी कीमतों पर अमेरिकी डॉलर के मज़बूत होने के प्रभाव की चिंताओं के बीच 3% से अधिक गिर गया।

इसी तरह, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर में भारी बिकवाली देखी गई, Nifty IT इंडेक्स 2% से अधिक लुढ़क गया। यह गिरावट वैश्विक प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स की अस्थिरता को दर्शाती है। भारतीय आईटी कंपनियां, जो अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा वैश्विक ग्राहकों से प्राप्त करती हैं, अक्सर टेक्नोलॉजी खर्च और AI-संचालित व्यावसायिक व्यवधानों के बारे में अनिश्चितता होने पर दबाव का सामना करती हैं। Infosys और TCS जैसी दिग्गज कंपनियों में निवेशकों द्वारा मांग के आउटलुक का पुनर्मूल्यांकन करने के कारण महत्वपूर्ण बिकवाली देखी गई।

रक्षात्मक सेक्टर्स की भूमिका

अस्थिर बाज़ार में, पैसा अक्सर उन सेक्टर्स की ओर जाता है जिन्हें आर्थिक चक्रों से कम प्रभावित माना जाता है। फार्मास्युटिकल और हेल्थकेयर सेक्टर्स व्यापक बिकवाली के बीच अपवाद रहे, जिन्होंने निवेशकों को कुछ रक्षात्मक कवर प्रदान किया। ये सेक्टर्स आम तौर पर व्यापक आर्थिक उतार-चढ़ाव के बावजूद स्थिर मांग दिखाते हैं, जिससे वे अनिश्चित समय में जोखिम कम करने की चाह रखने वाले निवेशकों के लिए एक आम विकल्प बन जाते हैं।

आगे क्या देखें?

निवेशकों के लिए, तत्काल निगरानी योग्य कारकों में वैश्विक बाज़ारों में स्थिरता और अमेरिकी ब्याज दर नीति पर स्पष्ट संकेत शामिल हैं, क्योंकि ये कारक वर्तमान में समग्र जोखिम उठाने की क्षमता को संचालित करते हैं। इसके अतिरिक्त, निवेशक घरेलू मानसून की प्रगति और आगामी तिमाही के नतीजों के मार्गदर्शन पर अपडेट पर नज़र रख सकते हैं, जो यह जानकारी प्रदान करेगा कि भारतीय कंपनियां एक बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में मांग का प्रबंधन कैसे कर रही हैं। यह समझने के लिए कि क्या हालिया बाज़ार गिरावट एक अस्थायी सुधार है या अस्थिरता की लंबी अवधि की शुरुआत, इन चरों की निगरानी महत्वपूर्ण होगी।

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