हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने शानदार तेजी दर्ज की। सेंसेक्स **828** अंकों की बढ़त के साथ **76,690** पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी **24,200** के पार निकल गया। इस उछाल में रिलायंस इंडस्ट्रीज का अहम योगदान रहा।
बाजार में लौटी रौनक
भारतीय शेयर बाजारों ने इस हफ्ते की समाप्ति शानदार तेजी के साथ की। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 828 अंक चढ़कर 76,690 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 24,228 के स्तर पर पहुंचकर 24,200 के महत्वपूर्ण लेवल को पार करने में कामयाब रहा। बाजार में लौटी इस रौनक ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है, जो हाल की गिरावट के बाद देखने को मिला है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की दमदार चाल
बाजार की इस जबरदस्त तेजी के पीछे रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) का बड़ा हाथ रहा। कंपनी के शेयरों में 2% की शानदार तेजी देखने को मिली। आपको बता दें कि सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों ही प्रमुख इंडेक्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज का वेटेज (Weightage) काफी ज्यादा है। ऐसे में जब RIL जैसी बड़ी कंपनी के शेयर बढ़ते हैं, तो पूरे इंडेक्स को ऊपर ले जाने में मदद मिलती है।
आगे क्या? निवेशकों की नजर नतीजों पर
फिलहाल, निवेशक घरेलू और ग्लोबल संकेतों के बीच तालमेल बिठा रहे हैं। हालांकि, आने वाले हफ्तों में बाजार की चाल काफी हद तक तिमाही नतीजों (Quarterly Earnings) पर निर्भर करेगी। जिन कंपनियों पर कर्ज ज्यादा है या जो कंपनियां कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से जूझ रही हैं, उनके लिए यह नतीजे यह बताने में अहम होंगे कि वे बढ़ती लागत के बीच अपने मुनाफे को कैसे बनाए रख पाएंगे।
ऐतिहासिक रूप से, जब बड़ी कंपनियों के दम पर बाजार चढ़ता है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होता है कि क्या मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी वैसी ही खरीदारी देखने को मिलती है। पिछले कुछ महीनों में इन शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। इसके अलावा, ब्याज दरों (Interest Rates) का मुद्दा भी बाजार के लिए अहम बना रहेगा। मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) में कोई भी बदलाव या महंगाई के आंकड़ों पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।
आगे चलकर, बाजार के खिलाड़ियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण अपडेट आने वाले तिमाही वित्तीय नतीजे और आर्थिक आंकड़े होंगे। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या निफ्टी के लिए 24,200 का सपोर्ट लेवल अगले कुछ सत्रों में बना रहता है और विभिन्न सेक्टरों के मैनेजमेंट की ओर से मांग और परिचालन लागत को लेकर क्या कहा जाता है।
