9 जुलाई को भारतीय शेयर बाज़ारों में शानदार वापसी देखी गई। निवेशकों ने हालिया गिरावट के बाद खरीदारी की, जिससे निफ्टी 24,000 के पार निकल गया। विदेशी निवेश में लगातार बढ़ोतरी और बाज़ार की अस्थिरता (Volatility) में कमी ने इस रिकवरी को और मज़बूती दी है।
बाज़ार में लौटी रौनक, सेंसेक्स-निफ्टी की जोरदार वापसी
9 जुलाई को भारतीय इक्विटी बाज़ारों ने ज़बरदस्त रिकवरी दिखाई। BSE सेंसेक्स 510 अंकों से ज़्यादा चढ़कर 77,014 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 24,000 के पार जाकर 24,037 पर पहुँच गया। यह उछाल हाल के बिकवाली के दौर के बाद आया है, जो निवेशकों के बदले मूड को दर्शाता है। बाज़ार में खरीदारों की वापसी से शेयर्स की कीमतों में इज़ाफ़ा हुआ है।
अस्थिरता (Volatility) में आई कमी, बढ़ा निवेशकों का भरोसा
इस सत्र (Session) के दौरान सबसे बड़ी राहत बाज़ार की अस्थिरता (Volatility) में आई कमी थी। 'फियर गेज' कहे जाने वाले इंडिया VIX में 7% की गिरावट दर्ज की गई। यह पिछली सत्र (Session) के बिल्कुल विपरीत था, जब यह इंडेक्स लगभग 30% तक उछल गया था। जब यह इंडेक्स गिरता है, तो इसका मतलब है कि निवेशक नज़दीकी भविष्य में अचानक या बड़े उतार-चढ़ाव को लेकर कम चिंतित हैं और बाज़ार में स्थिरता महसूस कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाज़ार इस समय मज़बूती दिखा रहा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंताएं अभी भी हैं, जो लगभग $80 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। हालांकि, यह माना जा रहा है कि यह स्तर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रबंधनीय है। जब तक प्रमुख आपूर्ति मार्ग (Supply Routes) जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) चालू हैं, बाज़ार बाहरी भू-राजनीतिक दबावों के बजाय घरेलू विकास पर ध्यान केंद्रित करता दिख रहा है।
व्यापक भागीदारी और विदेशी निवेश का योगदान
यह तेज़ी सिर्फ कुछ बड़ी कंपनियों तक ही सीमित नहीं रही। बाज़ार में व्यापक भागीदारी देखी गई, जहाँ करीब 2,246 शेयरों में बढ़ोतरी हुई, जबकि केवल 617 शेयर ही गिर पाए। इसके अलावा, मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स में क्रमशः 0.8% और 0.6% की बढ़त दर्ज की गई, जो दर्शाता है कि विश्वास बाज़ार के विभिन्न वर्गों में फैल रहा है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने इस रिकवरी में अहम भूमिका निभाई है। डेटा के अनुसार, ये निवेशक लगातार छह सत्रों (Sessions) से भारतीय इक्विटी में शुद्ध खरीदार (Net Buyers) रहे हैं। उन्होंने अकेले बुधवार को ₹1,963 करोड़ का निवेश किया, जो पिछले चार दिनों में बाज़ार में आए ₹3,900 करोड़ से ज़्यादा के सकारात्मक रुझान को जारी रखता है। विदेशी पूंजी का यह स्थिर प्रवाह अक्सर भारतीय लार्ज-कैप शेयरों, विशेष रूप से बैंकिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टरों में, के दीर्घकालिक दृष्टिकोण (Long-term Outlook) में विश्वास का संकेत माना जाता है।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण टेक्निकल लेवल
ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए, निफ्टी का 23,800 के स्तर से ऊपर बने रहना वर्तमान में सबसे महत्वपूर्ण है। बाज़ार विश्लेषक इस स्तर को एक सपोर्ट पॉइंट मानते हैं। जब तक इंडेक्स इस स्थिति को बनाए रखता है, यह मौजूदा गति को बनाए रखने में मदद कर सकता है। आने वाले कुछ सत्र (Sessions) यह देखने के लिए महत्वपूर्ण होंगे कि क्या यह रिकवरी जारी रहती है या बाज़ार को ऊंचे स्तरों पर फिर से बिकवाली के दबाव का सामना करना पड़ता है। निवेशक निरंतर ट्रेडिंग वॉल्यूम और वैश्विक कमोडिटी की कीमतों से संबंधित किसी भी नए अपडेट पर नज़र रखेंगे जो बाज़ार की भावना को प्रभावित कर सकते हैं।
