भारतीय शेयर बाजार में आज प्रॉफिट बुकिंग का दौर चला, जिससे चार दिनों की तेजी पर ब्रेक लग गया। BSE Sensex **104** अंक गिरकर **78,180** पर बंद हुआ। वहीं, Trent के शेयर रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमानों से पीछे रहने के कारण **12%** से ज्यादा टूट गए, जबकि HCL Tech और TCS जैसे IT स्टॉक्स में नतीजों से पहले तेजी दिखी।
बाजार में प्रॉफिट बुकिंग हावी, Sensex और Nifty लाल निशान पर
मंगलवार को भारतीय शेयर बाजारों ने गिरावट के साथ कारोबार का अंत किया। लगातार चार दिनों की बढ़त के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे BSE Sensex 104.35 अंक यानी 0.13% की गिरावट के साथ 78,180.72 पर बंद हुआ। इसी तरह, NSE Nifty 31.65 अंक टूटकर 24,398.70 पर रहा। इस दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल रहा, क्योंकि एशियाई बाजारों में सेमीकंडक्टर सेक्टर को लेकर चिंताओं के बीच बिकवाली का असर भारतीय बाजारों पर भी दिखा।
Trent के शेयर में भारी बिकवाली, रेवेन्यू रहा चिंता का सबब
प्रमुख शेयरों में Trent सबसे बड़ी गिरावट वाला स्टॉक रहा। कंपनी के शेयर 12.42% लुढ़क गए। यह गिरावट जून तिमाही के कंपनी के नतीजों के बाद आई, जिसमें रेवेन्यू ग्रोथ बाजार की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या यह स्टॉक वैल्यूएशन में आई नरमी का संकेत है या फिर कंपनी की ग्रोथ की रफ्तार में कोई बड़ा बदलाव आया है। रिटेल सेक्टर, खासकर परिधान और लाइफस्टाइल, अक्सर उपभोक्ता खर्च के पैटर्न के प्रति संवेदनशील होता है, इसलिए आने वाली तिमाहियों में शेयरधारकों के लिए रेवेन्यू की निरंतरता एक अहम पैमाना रहेगी।
IT सेक्टर में दिखी खरीदारी, नतीजों का इंतजार
इस अस्थिर सत्र के दौरान IT सेक्टर ने बाजार को सहारा देने का काम किया। HCL Tech के शेयर 3.08% चढ़े, क्योंकि कंपनी की आने वाली नतीजों की रिपोर्ट से पहले निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। इसी तरह, Tata Consultancy Services (TCS) के शेयर में भी तेजी देखी गई, क्योंकि निवेशक गुरुवार, 9 जुलाई को कंपनी के तिमाही नतीजों से पहले अपनी पोजीशन बना रहे थे। IT शेयरों की यह मजबूती मेटल और रियलिटी सेक्टरों के विपरीत थी, जिनके संबंधित इंडेक्स लगभग 1% और 1.6% गिरे।
तकनीकी स्तर और बाजार सपोर्ट
दिन की गिरावट के बावजूद, तकनीकी विश्लेषण से पता चलता है कि व्यापक अल्पकालिक रुझान अभी भी कुछ खास स्तरों पर जांच के दायरे में है। विश्लेषक Sensex के 78,000 के स्तर को एक महत्वपूर्ण सपोर्ट ज़ोन के रूप में देख रहे हैं। यदि बाजार इस स्तर से ऊपर बना रहता है, तो यह संकेत दे सकता है कि मौजूदा तेजी का रुझान बरकरार है। वहीं, यदि यह स्तर टूटता है, तो 77,500 से 77,700 के स्तर पर और गिरावट आ सकती है। ये स्तर वर्तमान बाजार परिदृश्य में ट्रेडरों के लिए मनोवैज्ञानिक और तकनीकी संकेतक का काम करेंगे।
निवेशकों को मार्जिन स्थिरता और विभिन्न क्षेत्रों में मांग के संकेतों के लिए आगामी नतीजों के सीजन पर नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले सत्र में ₹243.03 करोड़ की खरीदारी की थी, लेकिन वैश्विक दबावों और घरेलू मुनाफावसूली के मुकाबले बाजार स्तरों को बनाए रखने के लिए संस्थागत खिलाड़ियों की निरंतर भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।
