भारतीय शेयर बाज़ारों में 2 जुलाई 2026 को जोरदार तेज़ी देखी गई। आईटी (IT) शेयरों में खरीदारी के चलते सेंसेक्स **0.75%** चढ़कर **77,502** पर बंद हुआ। कच्चे तेल की गिरती कीमतों और सकारात्मक सेंटिमेंट ने बाज़ार को मजबूती दी। अब निवेशकों की नज़र **78,000** के स्तर पर है।
क्या हुआ आज?
गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार में शानदार तेज़ी देखने को मिली। प्रमुख इंडेक्स में उछाल आया। BSE सेंसेक्स 30 शेयरों वाला इंडेक्स 77,502.12 के स्तर पर बंद हुआ, जो 579.48 अंकों यानी 0.75% की बढ़त है। वहीं, NSE निफ्टी भी 169.85 अंकों यानी 0.71% की तेज़ी के साथ 24,175.70 पर बंद हुआ। यह तेज़ी कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और आईटी सेक्टर में हुई बाइंग के दम पर आई।
आईटी सेक्टर का कमाल
आज के दिन की सबसे बड़ी चाल आईटी सेक्टर में देखने को मिली। Infosys के शेयर 5.64% चढ़े, वहीं Tech Mahindra, Tata Consultancy Services, और HCL Tech जैसे बड़े नाम 4.12% से 4.32% तक चढ़े। निवेशकों के लिए आईटी सेक्टर ग्लोबल डिमांड और करेंसी की चाल पर काफी निर्भर करता है। जब ये शेयर बढ़ते हैं, तो सेंसेक्स और निफ्टी जैसे इंडेक्स पर इनका असर काफी ज्यादा होता है क्योंकि इनका वेटेज (weightage) इन बास्केट्स में काफी ज़्यादा होता है।
गिरते क्रूड ऑयल का क्यों है महत्व?
2 जुलाई को बाज़ार में आई इस तेजी के पीछे एक बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रही। भारत अपनी तेल की ज़रूरत का एक बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट (import) करता है, और ऐसे में ग्लोबल क्रूड प्राइसेस का कम होना घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा माना जाता है। इससे देश के इम्पोर्ट बिल पर दबाव कम होता है और कई मैन्युफैक्चरिंग (manufacturing) और ट्रांसपोर्ट (transport) से जुड़ी कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन (profit margin) को सहारा मिलता है। हालाँकि तेल की कीमतें ग्लोबल फैक्टर्स के चलते घटती-बढ़ती रहती हैं, लेकिन लगातार गिरावट को बाज़ार के लिए एक पॉजिटिव संकेत माना जाता है।
बाज़ार का संतुलन और पिछड़ने वाले सेक्टर्स
जहाँ इंडेक्स में तेज़ी आई, वहीं सभी सेक्टर्स या स्टॉक्स ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। कुछ बड़े स्टॉक्स में प्रॉफिट-टेकिंग (profit-taking) यानी मुनाफावसूली देखने को मिली। Larsen & Toubro, Maruti Suzuki, Axis Bank, और Reliance Industries जैसे बड़े नाम आज पिछड़ते दिखे। इसके अलावा, पावर (Power), PSU बैंक्स (PSU Banks) और कैपिटल गुड्स (Capital Goods) जैसे सेक्टर्स पर भी हल्का दबाव देखा गया। यह दिखाता है कि इंडेक्स की चाल भले ही बुलिश (bullish) हो, लेकिन कुछ खास स्टॉक्स में अभी भी वोलैटिलिटी (volatility) बनी हुई है और बाज़ार में चौतरफा खरीदारी नहीं है।
मोमेंटम (Momentum) को समझना
टेक्निकल (technical) लिहाज़ से, बाज़ार के एक्सपर्ट्स आगे की चाल का अंदाज़ा लगाने के लिए हालिया ट्रेंड्स को देख रहे हैं। इंडेक्स अपने 20-Day Exponential Moving Average से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं, जो कि एक शॉर्ट-टर्म (short-term) एवरेज प्राइस ट्रेंड को पहचानने का तरीका है। जब इंडेक्स इस लेवल से ऊपर रहता है, तो यह बताता है कि शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। इसके अलावा, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) जैसे इंडिकेटर्स, जो प्राइस मूवमेंट की स्पीड और बदलाव को मापते हैं, 60 को पार कर चुके हैं, जो बताता है कि मौजूदा मोमेंटम मजबूत है।
आगे निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशक 78,000 से 78,200 के ज़ोन पर नज़र रख सकते हैं, जिसे फिलहाल एक अहम रेजिस्टेंस ज़ोन (resistance zone) माना जा रहा है - वो लेवल जहाँ से बाज़ार को पहले भी ऊपर जाने में मुश्किल हुई है। इस लेवल से ऊपर लगातार बने रहना और तेज़ी का संकेत दे सकता है। वहीं, 76,900 से 77,000 के लेवल को इमीडिएट सपोर्ट (immediate support) के तौर पर देखा जा रहा है। टेक्निकल लेवल्स के अलावा, ग्लोबल इकोनॉमिक क्यूज़ (global economic cues), कॉर्पोरेट अर्निंग्स (corporate earnings) की विजिबिलिटी (visibility) और कच्चे तेल या करेंसी के ट्रेंड्स में कोई बड़ा बदलाव मुख्य रूप से ध्यान देने लायक रहेंगे।
