75+ वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत! अब ITR फाइल करने से मिलेगी छूट, जानें नया नियम

OTHER
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
75+ वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत! अब ITR फाइल करने से मिलेगी छूट, जानें नया नियम
Overview

75 साल और उससे ज़्यादा उम्र के टैक्सपेयर्स (Taxpayers) अब इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की झंझट से बच सकते हैं। नए नियम के तहत, वे अपनी बैंक को टैक्स कम्प्लायंस (Tax Compliance) की जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

बैंकों पर आई टैक्स फाइलिंग की ज़िम्मेदारी

फॉर्म 125 के नए नियम के अनुसार, 75 साल या उससे ज़्यादा उम्र के वो वरिष्ठ नागरिक जिनके पास सिर्फ पेंशन और बैंक से मिलने वाला ब्याज (Bank Interest) आय का स्रोत है, उन्हें अब इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की ज़रूरत नहीं होगी। इस नियम के तहत, बैंक ही टैक्स की गणना (Calculate) करेंगे और टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) के ज़रिए पैसा काट लेंगे। इसका मकसद बुजुर्ग टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स प्रक्रिया को आसान बनाना है।

फॉर्म 125 कैसे काम करेगा?

हालांकि ITR फाइलिंग की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑटोमेटिक नहीं है। पेंशनर्स को अपने बैंक में फॉर्म 125 जमा करना होगा, जिसमें उन्हें अपनी आय के स्रोतों की जानकारी देनी होगी। बैंक इस जानकारी का उपयोग करके TDS की गणना करेगा। लेकिन, अगर किसी टैक्सपेयर के पास आय का कोई और स्रोत है जो घोषित नहीं किया गया है, जैसे किसी दूसरे बैंक खाते से आय या शेयर बाजार (Capital Market) से मामूली कमाई, तो बैंक की TDS गणना गलत हो सकती है। इससे टैक्स कम चुकाने की नौबत आ सकती है। यह ज़रूरी है कि टैक्सपेयर्स बैंक को दी गई जानकारी की सटीकता के लिए खुद ज़िम्मेदार होंगे।

छिपी हुई आय से जुड़ी संभावित समस्याएं

जानकारों का मानना है कि बैंक किसी टैक्सपेयर की पूरी वित्तीय तस्वीर (Financial Picture) नहीं देख सकते। ऐसे में, जिन व्यक्तियों के पास पेंशन और बैंक ब्याज के अलावा आय के अन्य स्रोत हैं, वे गलती से फॉर्म 125 का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर कभी ऑडिट (Audit) होता है, तो टैक्सपेयर को अपनी टैक्स कम्प्लायंस साबित करने के लिए फॉर्म 16 (Form 16) और ब्याज प्रमाणपत्र (Interest Certificates) जैसे दस्तावेज़ अभी भी दिखाने होंगे। ऐसे में, उन लोगों के लिए यह छूट उतनी राहत भरी नहीं हो सकती जिन्हें अपने रिकॉर्ड्स को व्यवस्थित रखना ही है।

बैंकों और टैक्स सिस्टम पर प्रभाव

वित्तीय संस्थानों (Financial Institutions) को इन खास टैक्स गणनाओं को संभालने के लिए अपने सिस्टम में निवेश करना होगा, जिससे शायद उनकी ऑपरेशनल लागत (Operational Costs) बढ़ सकती है। टैक्स डिपार्टमेंट (Tax Department) संभवतः TDS की सटीकता की निगरानी करेगा ताकि किसी भी बड़े अंतर का पता लगाया जा सके। यह कदम बैंकिंग चैनलों के माध्यम से टैक्स कम्प्लायंस को ऑटोमेट (Automate) करने की दिशा में एक बड़ा संकेत है, जिसमें टैक्स कलेक्शन में समग्र दक्षता (Overall Efficiency) को प्राथमिकता दी गई है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.