जम्मू-कश्मीर के बड़गाम जिले में सुरक्षाबलों ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर मोहम्मद आसिफ को मार गिराया है। 'ऑपरेशन शेरवाली' के तहत हुई इस कार्रवाई से चार सदस्यों वाले एक कुख्यात आतंकी मॉड्यूल का पूरी तरह सफाया हो गया है।
ऑपरेशन की सफलता
भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के संयुक्त ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कमांडर मोहम्मद आसिफ को बड़गाम के कोराग-यूसमर्ग इलाके में मार गिराया गया है। खुफिया एजेंसियों के लंबे ट्रैकिंग मिशन के बाद यह सफलता हाथ लगी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मोहम्मद आसिफ, जिसे 'मूसा फौजी' के नाम से भी जाना जाता था, पाकिस्तानी सेना का पूर्व स्पेशल फोर्सेज कमांडो था।
आतंकी मॉड्यूल का अंत
आसिफ की मौत के साथ ही उस 4 सदस्यीय आतंकी सेल का अंत हो गया है, जो 2022 से घाटी में सक्रिय था। सुरक्षाबलों ने इससे पहले इसी सेल के अन्य आतंकियों— जुनैद भट, सुलेमान और यासिर को ढेर कर दिया था। यह मॉड्यूल जंगलों में छिपकर 'हिट-एंड-रन' जैसी खतरनाक वारदातों को अंजाम देने में माहिर था।
'ऑपरेशन शेरवाली' का असर
मई 2026 में शुरू किए गए 'ऑपरेशन शेरवाली' का मकसद आतंकियों की लॉजिस्टिक्स और मूवमेंट को ट्रैक करना था। गृह मंत्रालय (MHA) के मुताबिक, इस ग्रुप का हाथ पहलगाम, डेरा की गली, हालन और कंडी में हुए कई हमलों में था। सुरक्षाबलों ने तकनीकी निगरानी और ह्युमन इंटेलिजेंस के सटीक तालमेल से इन्हें ट्रैक किया।
क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने के लिए इस तरह के ऑपरेशन बेहद महत्वपूर्ण हैं। हालांकि आतंकवाद विरोधी अभियान अभी भी जारी है ताकि घुसपैठ के रास्तों और फंडिंग नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
