📊 कंसोलिडेटेड परफॉरमेंस का लेखा-जोखा
Sastasundar Ventures Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में अपने कंसोलिडेटेड नतीजों में शानदार परफॉरमेंस दिखाई है। कंपनी ने ₹35.87 लाख का नेट प्रॉफिट (Net Profit) दर्ज किया है। पिछले साल की इसी तिमाही (Q3 FY25) में कंपनी को ₹4,002.52 लाख का बड़ा घाटा हुआ था, और पिछली तिमाही (Q2 FY26) में भी ₹1,543.93 लाख का घाटा था। इस बार मुनाफे में वापसी का सबसे बड़ा कारण रहा एक्सेप्शनल आइटम्स (exceptional items) में आया बड़ा सकारात्मक बदलाव। पिछले साल के नौ महीनों (9MFY25) में जहां ₹19,090.91 लाख के एक्सेप्शनल घाटे थे, वहीं इस तिमाही में सिर्फ ₹16.61 लाख का मामूली एक्सेप्शनल आइटम रहा।
कंपनी के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (Consolidated Revenue) ने भी दम दिखाया। यह साल-दर-साल (YoY) 23% बढ़कर ₹34,573.70 लाख पर पहुंच गया। पिछली तिमाही (Q2 FY26) के मुकाबले भी रेवेन्यू में 14.7% की बढ़ोतरी हुई, जो ₹30,132.06 लाख था। वहीं, 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुए नौ महीनों (9MFY26) में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹1,152.15 लाख रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹14,031.11 लाख का घाटा था। नौ महीनों में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 14.5% बढ़कर ₹94,548.58 लाख हो गया।
⚠️ स्टैंडअलोन नतीजे चिंताजनक
जहां कंसोलिडेटेड स्तर पर कंपनी ने बेहतर नतीजे पेश किए हैं, वहीं Sastasundar Ventures Limited के स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजे चिंता बढ़ा रहे हैं। कंपनी ने Q3 FY26 में ₹40.99 लाख का स्टैंडअलोन नेट लॉस दर्ज किया है, जो Q3 FY25 के ₹10.49 लाख के घाटे से काफी ज्यादा है। स्टैंडअलोन रेवेन्यू भी घटकर ₹9.46 लाख रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹10.72 लाख था। नौ महीनों (9MFY26) का स्टैंडअलोन नेट लॉस ₹79.92 लाख रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹64.54 लाख के घाटे से भी अधिक है।
🚩 सब्सिडियरी पर 'गोइंग कंसर्न' का खतरा
वित्तीय नतीजों के साथ एक बड़ी चिंता सामने आई है, वो है कंपनी की स्टेप-डाउन सब्सिडियरी (step-down subsidiary) Genu Path Labs Limited की 'मटेरियल अनसर्टेनिटी रिलेटिंग टू गोइंग कंसर्न' (Material Uncertainty Relating to Going Concern)। इसका मतलब है कि कंपनी के ऑडिटर्स ने इस सब्सिडियरी के भविष्य को लेकर अनिश्चितता जताई है। इसकी वजह है सब्सिडियरी का घटा नेट वर्थ (net worth) और मौजूदा देनदारियों (current liabilities) का मौजूदा संपत्तियों (current assets) से अधिक होना। हालांकि, ऑडिटर्स ने अपनी राय में कोई बदलाव नहीं किया है और पैरेंटल सपोर्ट के भरोसे पर फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स तैयार किए गए हैं, लेकिन यह सब्सिडियरी के अंदरूनी वित्तीय तनाव को दर्शाता है।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि कंसोलिडेटेड मुनाफे में बड़ी वापसी काफी हद तक पिछली बार के एक्सेप्शनल लॉसेस (exceptional losses) के रिवर्सल (reversal) के कारण हुई है, खासकर Flipchart Health Limited में निवेश के लिक्विडेशन (liquidation) से हुए बड़े घाटे का। इसलिए, निवेशकों को इन एकमुश्त (one-off) घटनाओं से होने वाले मुनाफे की स्थिरता पर गौर करना चाहिए, न कि कोर ऑपरेशंस (core operations) पर।
कंपनी ने अपनी एक प्रमुख सब्सिडियरी Sastasundar Healthbuddy Limited (SHBL) में ₹10,000 लाख का बाय-बैक (buy-back) पूरा किया, जिससे Sastasundar Ventures की हिस्सेदारी बढ़कर 78.89% हो गई। इसके अलावा, सब्सिडियरी Happymate Foods Limited की बिक्री भी पूरी हो गई।
कंपनी के मैनेजमेंट की ओर से भविष्य के लिए कोई फॉरवर्ड-लुकिंग गाइडेंस (forward-looking guidance) या आउटलुक (outlook) नहीं दिया गया है, जिससे निवेशकों को भविष्य के रेवेन्यू, प्रॉफिटेबिलिटी या स्ट्रेटेजिक इनिशिएटिव्स (strategic initiatives) के लिए कोई स्पष्ट लक्ष्य नहीं मिल पाया है। कंसोलिडेटेड और स्टैंडअलोन परफॉरमेंस में बड़ा अंतर और एक प्रमुख सब्सिडियरी की गोइंग कंसर्न समस्या, इसे एक जटिल निवेश का मामला बनाती है।