Q3 में ऑपरेशनल परफॉरमेंस पर दबाव
Sarda Energy & Minerals के लिए दिसंबर तिमाही (Q3 FY26) में ऑपरेशनल लेवल पर कुछ चुनौतियाँ रहीं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 3.3% घटकर ₹1,276 करोड़ पर आ गया। वहीं, EBITDA में 15.7% की बड़ी गिरावट देखने को मिली, जो ₹310.8 करोड़ रहा। सबसे चिंताजनक बात यह है कि EBITDA मार्जिन घटकर 24.36% हो गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 27.95% था। यह दर्शाता है कि कंपनी को बढ़ती लागतों या कम कीमतों के कारण अपने रेवेन्यू को मुनाफे में बदलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। स्टैंडअलोन बेसिस पर भी नेट प्रॉफिट घटकर ₹163.1 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹189.2 करोड़ था।
नौ महीने में तगड़ी उछाल, लेकिन अधिग्रहण पर तलवार
तिमाही नतीजों के विपरीत, अप्रैल 2025 से दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों के नतीजे काफी शानदार रहे। कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 60.2% का जबरदस्त उछाल आया और यह ₹947.9 करोड़ पर पहुँच गया, जबकि रेवेन्यू 30.3% बढ़कर ₹4,436.9 करोड़ हो गया। इस शानदार ग्रोथ का मुख्य श्रेय SKS Power Generation (Chhattisgarh) Limited के अधिग्रहण और उसके कंपनी में विलय को जाता है, जो सितंबर 2024 में पूरा हुआ था।
लेकिन, इस बड़ी ग्रोथ पर एक बड़े खतरे का बादल मंडरा रहा है। SKS Power का यह अधिग्रहण वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती का सामना कर रहा है, और कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। ऐसे में, यदि कोर्ट का फैसला कंपनी के खिलाफ आता है, तो इसके कंसोलिडेटेड नतीजों और भविष्य की योजनाओं पर बड़ा असर पड़ सकता है। कंपनी ने खुद भी माना है कि नौ महीने के नतीजे इस विलय के कारण सीधे तौर पर तुलना करने योग्य नहीं हैं।
शेयर बाजार में क्या है राय?
Sarda Energy & Minerals का शेयर फिलहाल लगभग 17.5x के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, जो इसे सेक्टर की अन्य कंपनियों के मुकाबले आकर्षक बनाता है। स्टील सेक्टर में JSW Steel (38.46x) और Tata Steel (33.34x) की तुलना में इसका P/E काफी कम है, और SAIL (21.45x) से भी थोड़ा नीचे है। पावर सेक्टर में NTPC (14.64x) और Power Grid Corpn (17.54x) के बराबर है, हालांकि Adani Power (25.72x) से कम है। कंपनी का ROCE 15.27% है, जो काफी मजबूत माना जाता है।
भारत का स्टील और एनर्जी सेक्टर सरकारी नीतियों के कारण मजबूत दिख रहा है। पिछले एक साल में एनर्जी सेक्टर 15% बढ़ा है। टेक्निकल चार्ट पर भी शेयर में बाय सिग्नल दिख रहे हैं, लेकिन बढ़ते दामों के साथ वॉल्यूम में गिरावट चिंता का विषय है। इसके बावजूद, शेयर शुक्रवार को ₹530 पर बंद हुआ और पिछले एक साल में 13.67% चढ़ चुका है, जो दिखाता है कि निवेशक तिमाही के ऑपरेशनल दबावों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।
जोखिम और भविष्य की राह
Sarda Energy & Minerals के लिए सबसे बड़ा जोखिम SKS Power के अधिग्रहण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहा कानूनी मामला है। अगर कोर्ट का फैसला प्रतिकूल आता है, तो कंपनी के प्रॉफिट और वैल्यूएशन पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, Q3 में EBITDA मार्जिन में आई गिरावट ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर सवाल खड़े करती है।
कंपनी ने 9 फरवरी 2026 को एक इन्वेस्टर कॉल बुलाई है, जिसमें वह अपनी रणनीति और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करेगी। फिलहाल, शेयर के लिए 'होल्ड/एक्युमुलेट' की सलाह दी जा रही है, लेकिन SKS Power के कानूनी मामले का हल और ऑपरेशनल मार्जिन में सुधार कंपनी के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।