Sankara Eye Foundation ने स्वास्थ्य सेवा में 50 साल पूरे कर लिए हैं। कंपनी अपने **14** अस्पतालों को **80:20** क्रॉस-सब्सिडी मॉडल पर चला रही है और **2030** तक **100** ग्रामीण विजन सेंटर खोलने का लक्ष्य रखा है।
80:20 फाइनेंशियल मॉडल का जादू
फाउंडेशन एक खास क्रॉस-सब्सिडी फ्रेमवर्क पर काम करता है, जहां 20% भुगतान करने वाले मरीजों से मिलने वाले रेवेन्यू का उपयोग 80% मुफ्त इलाज के लिए किया जाता है। अस्पताल के क्षेत्र में कैपिटल खर्च बहुत ज्यादा होता है, इसलिए नए सेंटर्स को आत्मनिर्भर (Break-even) बनने में 5 से 7 साल का लंबा समय लगता है। अभी इसके 14 में से सिर्फ 6 अस्पताल ही इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं, बाकी यूनिट्स अभी भी डोनर कैपिटल और CSR फंडिंग पर निर्भर हैं।
ऑपरेशन्स की कुशलता
बड़े पैमाने पर मरीजों का इलाज करने के लिए फाउंडेशन ने मैन्युफैक्चरिंग असेंबली लाइन जैसा प्रोसेस अपनाया है। कोयंबटूर यूनिट में हर दिन लगभग 250 मुफ्त सर्जरी की जाती हैं। इसके लिए मरीजों की पहचान के लिए कलर-कोडेड आईडी कार्ड और गाउन का इस्तेमाल होता है, जिससे डायबिटीज या हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों वाले मरीजों को तुरंत पहचाना जा सके।
टैलेंट की कमी को दूर करना
अस्पतालों के विस्तार में सबसे बड़ी बाधा स्किल्ड स्टाफ की कमी होती है। इसे हल करने के लिए 2002 में 'Sankara Academy of Vision' की शुरुआत की गई। यह एकेडमी ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को विजन-केयर टेक्नीशियन के तौर पर तैयार करती है। अब फाउंडेशन अपनी ट्रेनिंग को बेंगलुरु और गुंटूर जैसे शहरों में विकेंद्रीकृत (Decentralize) कर रहा है ताकि 2030 तक 100 सेंटर्स का लक्ष्य हासिल किया जा सके। भविष्य में, फाउंडेशन अब पेशेंट फीडबैक और आउटकम के लिए AI का उपयोग करने की तैयारी में है।
