Samajwadi Party के सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने कांग्रेस की 150 सीटों की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले 'INDIA' गठबंधन में बढ़ती यह दरार राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत फैसलों के लिहाज से निवेशकों के लिए अहम है।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर गठबंधन के अंदर खींचतान तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने कांग्रेस की 150 सीटों की मांग को अव्यावहारिक बताते हुए इसे ठुकरा दिया है।
आंकड़ों का खेल और असहमति
शिवपाल सिंह पटेल ने तर्क दिया कि 2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें केवल 2 सीटें ही मिल पाई थीं। सपा का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के आधार पर कांग्रेस को अधिकतम 50 सीटें देना ही उचित होगा। खबरों के अनुसार, समाजवादी पार्टी ने अपने लिए लगभग 350 सीटें सुरक्षित कर ली हैं, जिससे गठबंधन सहयोगियों के लिए जगह काफी कम रह गई है।
क्या है गठबंधन की चुनौती?
तनाव सिर्फ सीट बंटवारे तक सीमित नहीं है। समाजवादी पार्टी का दावा है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली 6 सीटें वास्तव में सपा के समर्थन का नतीजा थीं। इसके अलावा, सपा प्रमुख अखिलेश यादव की हालिया दिल्ली बैठकों से दूरी ने भी गठबंधन के भीतर संवाद की कमी को उजागर किया है।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?
उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और नेशनल जीडीपी में इसका बड़ा योगदान है। निवेशकों के लिए यूपी में राजनीतिक स्थिरता का सीधा असर भूमि अधिग्रहण, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) और सरकारी नीतिगत फैसलों पर पड़ता है। गठबंधन में जारी इस रस्साकशी से नीतिगत फैसलों में देरी या प्राथमिकताओं में बदलाव की आशंका बनी रहती है, जिस पर बड़े कॉर्पोरेट्स और निवेशकों की पैनी नजर है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों दल आपसी बातचीत से समाधान निकाल पाते हैं या 2027 की चुनावी रणनीति में और भी दरारें देखने को मिलेंगी।
