उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने SSC GD Constable परीक्षा को हैक करने के मामले में मास्टरमाइंड अरुण कुमार उर्फ 'डेविल' को गिरफ्तार किया है। यह मामला भारत की डिजिटल भर्ती परीक्षाओं में सुरक्षा की गंभीर खामियों को उजागर करता है।
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत एसएससी जीडी कॉन्स्टेबल परीक्षा में सेंध लगाने वाले मुख्य आरोपी अरुण कुमार, जिसे 'डेविल' के नाम से जाना जाता है, को हिरासत में लिया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने परीक्षा केंद्रों पर डिजिटल सुरक्षा प्रोटोकॉल को बायपास करने के लिए एक बेहद जटिल सिस्टम तैयार किया था। यह गिरफ्तारी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कैसे काम करता था 'सॉल्वर गैंग'?
जांच में सामने आया है कि आरोपी का नेटवर्क बेहद शातिर था। रेड के दौरान पुलिस ने माइक्रोकंप्यूटर और वीडियो कैप्चर डिवाइस जैसे अवैध हार्डवेयर बरामद किए हैं। इन उपकरणों के जरिए आरोपी दूर बैठकर कैंडिडेट के कंप्यूटर टर्मिनल का एक्सेस ले लेते थे और रियल-टाइम में परीक्षा को कंट्रोल करते थे।
दायरा बढ़ा: सीतापुर से पूर्वोत्तर तक फैले तार
STF की जांच सिर्फ SSC GD तक सीमित नहीं है। इस गिरोह के तार सीतापुर में हुए 2024 के नर्सिंग ऑफिसर एग्जाम में हेरफेर से भी जुड़े पाए गए हैं। गिरोह का संचालन बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में फैले 'सॉल्वर गैंग्स' के जरिए होता था। अब तक ग्रेटर नोएडा रेड के सिलसिले में कुल 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
साइबर सुरक्षा के लिए बड़ी चेतावनी
यह घटना उन तमाम सरकारी और प्राइवेट संस्थानों के लिए एक अलार्म है जो अपनी भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर चुके हैं। जैसे-जैसे तकनीक पर निर्भरता बढ़ रही है, परीक्षाओं की सुरक्षा और एडवांस ऑथेंटिकेशन को लेकर दबाव बढ़ना तय है। अब सरकारी एजेंसियों को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती और ऑडिटिंग के तरीकों को और कड़ा करने की जरूरत होगी।
