QIBs ने बचाई IPO की इज्जत
SMR Jewels के IPO के आखिरी सब्सक्रिप्शन आंकड़े एक बड़ी कमजोरी को छिपा रहे हैं। इश्यू आखिरकार 1.09 गुना सब्सक्राइब हुआ, लेकिन यह नतीजा सिर्फ Qualified Institutional Buyers (QIBs) की आखिरी वक्त की खरीदारी की वजह से ही मुमकिन हो पाया, जिन्होंने अपने लिए रिजर्व कोटे को 5.41 गुना भर दिया। अगर ये बड़े निवेशक आखिरी वक्त में नहीं आते, तो यह IPO फेल भी हो सकता था। इस साल कई छोटे-कैप (Small-cap) इश्यू ऐसे ही अंडरसब्सक्रिप्शन का शिकार हुए हैं, क्योंकि निवेशक अब बहुत सोच-समझकर पैसा लगा रहे हैं।
आउटसोर्सिंग मॉडल का खेल
दूसरी बड़ी ज्वैलरी कंपनियों के उलट, जिनके पास अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स होती हैं, SMR Jewels 'एसेट-लाइट' मॉडल पर काम करती है, यानी प्रोडक्शन बाहरी कारीगरों से करवाती है। इससे कंपनी की शुरुआत में पूंजी कम लगती है और बिजनेस आसानी से बढ़ाया जा सकता है। लेकिन, इस मॉडल में क्वालिटी और सप्लाई चेन पर पूरा कंट्रोल रखना मुश्किल होता है। कंपनी IPO से मिले पैसों से नया स्टूडियो बनाने वाली है, जिससे यह साफ है कि वो प्रोडक्शन को अपने कंट्रोल में लाने की कोशिश कर रही है। यह बदलाव काफी महंगा और मुश्किल साबित हो सकता है।
वैल्यूएशन और गवर्नेंस पर सवाल?
निवेशकों का सतर्क रहना जायज है। SME सेगमेंट में अक्सर IPOs बहुत ज्यादा वैल्यूएशन पर आते हैं और लिस्टिंग के बाद शेयरों की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिलती है। ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में भी कोई खास उत्साह नहीं दिख रहा है, जिससे लगता है कि 8 जून को BSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग के बाद शेयरों की मांग कम रह सकती है। इसके अलावा, बाहरी कारीगरों पर निर्भरता कंपनी के लिए एक बड़ा रिस्क है। अगर सप्लायर्स के साथ कोई दिक्कत आती है या क्वालिटी कंट्रोल में चूक होती है, तो कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे निपटना उसके लिए मुश्किल हो सकता है। SME स्पेस में गवर्नेंस स्टैंडर्ड्स (Governance Standards) भी मेनबोर्ड की तुलना में कमजोर होते हैं, और बिडिंग पीरियड को बढ़ाना और प्राइस बैंड को कम करना इस बात का संकेत है कि कंपनी ने आखिरी वक्त में दिलचस्पी जगाने के लिए काफी मशक्कत की है।
आगे का रास्ता
IPO से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल ज्वैलरी स्टूडियो, कर्ज कम करने और वर्किंग कैपिटल (Working Capital) के लिए किया जाएगा। यह देखना होगा कि क्या कंपनी सिर्फ डिजाइन पर फोकस करने वाली कंपनी से एक मजबूत, इंटीग्रेटेड प्लेयर बन पाती है या नहीं। एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। हालांकि 2024 में ₹124.52 करोड़ से 2025 में ₹263.25 करोड़ तक का रेवेन्यू ग्रोथ शानदार है, लेकिन कॉम्पिटिशन से भरे ज्वैलरी मार्केट में इस रफ्तार को बनाए रखना आसान नहीं होगा। कंपनी पब्लिक मार्केट में अपने बिजनेस को कितना बढ़ा पाती है, यही उसके शेयर की असली कीमत तय करेगा।
