बजट का बड़ा ऐलान: SGBs पर टैक्स का नया नियम
भारतीय बजट 2026 में कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax) से जुड़े एक बड़े ऐलान ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) के निवेशकों को चौंका दिया है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने बजट में घोषणा की कि अब कैपिटल गेन्स टैक्स में छूट केवल ओरिजिनल सब्सक्राइबर (original subscribers) को ही मिलेगी, बशर्ते वे बॉन्ड को मैच्योरिटी तक होल्ड करें। सेकेंडरी मार्केट (secondary market) से खरीदे गए SGBs पर यह टैक्स छूट खत्म कर दी गई है। इस फैसले का असर सोमवार, 2 फरवरी 2026 को तुरंत देखने को मिला, जब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर कई मैच्योरिटी वाले SGBs की कीमतों में भारी गिरावट आई। SGBDEC26 करीब 10% यानी ₹1,760 गिरकर ₹15,840 पर आ गया, जबकि SGBSEP31II भी लगभग 10% लुढ़ककर ₹14,575.77 पर पहुंच गया।
डेरिवेटिव्स पर STT Hike: मार्केट में हलचल
SGBs पर टैक्स नियमों के बदलाव से शेयर बाजार में पहले से ही मायूसी थी, और इस बीच बजट 2026 में इक्विटी डेरिवेटिव्स (Equity Derivatives) पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में बड़ी बढ़ोतरी से मार्केट में और हलचल मच गई। फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स (Futures Contracts) पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है, और ऑप्शंस (Options) पर इसे 0.1% व 0.125% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। इस बढ़ोतरी से खास तौर पर डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वालों की लागत काफी बढ़ गई है, जिसका सीधा असर ट्रेडिंग वॉल्यूम्स पर पड़ने की आशंका है।
व्यापक मार्केट पर असर और रिकवरी की कोशिश
SGBs पर टैक्स और STT में बढ़ोतरी के दोहरे झटके से शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी गई। रविवार, 1 फरवरी 2026 को सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) जैसे प्रमुख इंडेक्स करीब 2% तक गिर गए थे, जिससे निवेशकों की करीब ₹10 लाख करोड़ की वेल्थ खत्म हो गई। ब्रोकरेज फर्म्स और एक्सचेंजों से जुड़ी कंपनियों के शेयर भी बुरी तरह प्रभावित हुए। Angel One और BSE Ltd जैसे स्टॉक्स 13% से ज्यादा गिरे, क्योंकि बाजार को डर है कि ट्रांजेक्शन वॉल्यूम्स कम हो जाएंगे। हालांकि, सोमवार, 2 फरवरी को वैल्यू बाइंग (Value Buying) के चलते बाजार में कुछ रिकवरी जरूर आई, लेकिन बजट के इन निगेटिव इम्प्लिकेशन्स को लेकर अभी भी निवेशक सतर्क हैं।
एक्सपर्ट्स की राय और फिस्कल स्ट्रेटेजी
मार्केट के जानकारों का मानना है कि बजट में लाए गए इन बदलावों से आने वाले समय में कुछ चुनौतियां पेश आ सकती हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन और को-फाउंडर, राAMDdeo Agrawal का कहना है, "हमें STT के कैपिटल मार्केट पर पड़ने वाले असर को लेकर यथार्थवादी (realistic) रहना होगा। STT में बढ़ोतरी और डिविडेंड पर टैक्स को लेकर नए नियम बाजार के लिए एक हेडविंड (headwind) साबित हो सकते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि इससे अल्पावधि (short term) में लिक्विडिटी और लीवरेज पर असर पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि लॉन्ग-टर्म अर्निंग्स का आउटलुक अभी भी मजबूत है, जो फिस्कल डिसिप्लिन (fiscal discipline) और कैपिटल एक्सपेंडिचर (capital expenditure) पर सरकार के फोकस से समर्थित है।
सरकारी लक्ष्य और बॉन्ड यील्ड्स
सरकार का वित्तीय घाटा (fiscal deficit) GDP का 4.3% रखने का लक्ष्य और ₹17.2 लाख करोड़ का रिकॉर्ड ग्रॉस बॉरोइंग प्लान (gross borrowing plan) बजट की मुख्य रणनीति का हिस्सा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि यह बॉरोइंग प्लान बॉन्ड यील्ड्स (bond yields) पर ऊपरी दबाव डाल सकता है। नए SGB टैक्स नियम, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे, का उद्देश्य टैक्स बेनिफिट्स को सरल बनाना और सीधे सरकारी चैनलों के माध्यम से सोने में निवेश को प्रोत्साहित करना है।