भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 2025-26 के लिए कर्मचारी कल्याण की नई योजनाओं का ऐलान किया है। इसमें दृष्टिबाधित कर्मचारियों के लिए AI-पावर्ड ग्लासेस, NPS में ज़्यादा योगदान और आसान होम लोन के नियम शामिल हैं। ये SEBI की आंतरिक नीतियां हैं और शेयर बाज़ार पर इनका कोई असर नहीं होगा।
SEBI का कर्मचारियों पर फोकस: क्या हैं नई सुविधाएं?
भारतीय शेयर बाज़ार के नियामक, SEBI ने 2025-26 के लिए अपने कर्मचारियों के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की है। इन नई पहलों का मकसद समावेशिता बढ़ाना और कर्मचारियों को बेहतर सहायता प्रदान करना है।
दृष्टिबाधित कर्मचारियों के लिए AI ग्लासेस
SEBI ने खास तौर पर दृष्टिबाधित कर्मचारियों की मदद के लिए Meta Ray-Ban AI-पावर्ड ग्लासेस की शुरुआत की है। कंपनी का कहना है कि यह तकनीक कर्मचारियों को रोज़मर्रा के काम में सहायता करेगी, जिससे उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और ऑफिस में काम करना ज़्यादा आसान होगा।
बढ़ी हुई पेंशन और आसान होम लोन
वित्तीय सहायता योजनाओं में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। SEBI ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के टियर-I खातों के लिए अपना योगदान बढ़ाकर 14% कर दिया है, जो कि केंद्र सरकार के मानकों के बराबर है। इसके अलावा, होम लोन योजना को भी अपडेट किया गया है। अब ज़्यादा लोन राशि मिलेगी और क्रेडिट स्कोर की ज़रूरतें भी ज़्यादा लचीली होंगी। खास बात यह है कि कर्मचारी अब दूसरे घर के लिए भी लोन ले सकेंगे, जो पहले के सख्त नियमों से एक बड़ा बदलाव है।
अन्य कल्याणकारी कदम
पर्सनल एडवांस की सीमाएं भी बढ़ाई गई हैं, जैसे बच्चों की शिक्षा और कंज्यूमर ड्यूरेबल (उपभोक्ता वस्तुएं) खरीदने के लिए। मुंबई में लीज्ड अकोमोडेशन स्कीम के तहत किराये की सीमा को भी बाज़ार की मौजूदा कीमतों के हिसाब से बढ़ाया गया है।
प्रोफेशनल और पर्सनल डेवलपमेंट
प्रोफेशनल और पर्सनल डेवलपमेंट के लिए, SEBI ने फैमिली और ट्रैवल बेनिफिट्स का दायरा बढ़ाया है। अब ग्रेड 'A' के सभी कर्मचारियों को 'लीव फेयर कंसेशन' (LFC) स्कीम के तहत हवाई यात्रा की सुविधा मिलेगी। काम करने वाली माताओं के लिए भी समर्थन बढ़ाया गया है, जिन्हें मैटरनिटी लीव के बाद 90 दिनों तक घर से काम करने की सुविधा मिलेगी, साथ ही चाइल्डकेयर या क्रेच की सुविधाओं तक बेहतर पहुंच भी होगी।
ज़रूरी बात: पाठकों को यह समझना महत्वपूर्ण है कि SEBI भारत सरकार द्वारा स्थापित एक वैधानिक नियामक संस्था है, कोई सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनी नहीं। इसलिए, ये सभी बदलाव पूरी तरह से SEBI के अपने मानव संसाधन और कर्मचारी प्रबंधन से जुड़े आंतरिक प्रशासनिक परिवर्तन हैं। इनका शेयर की कीमतों, वित्तीय बाज़ारों या कॉर्पोरेट ऋण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि ये निर्णय उन सूचीबद्ध कंपनियों से पूरी तरह असंबंधित हैं जिन्हें SEBI विनियमित करता है।
