सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि वह कक्षा 6 के छात्रों के लिए अनिवार्य 'थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी' को **1 जनवरी 2027** तक टाल दे। इस कदम का उद्देश्य छात्रों की पढ़ाई में बीच सत्र में आने वाली बाधाओं को रोकना है।
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच, जिसका नेतृत्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत कर रहे थे, ने कहा है कि मौजूदा एकेडमिक ईयर के बीच में छात्रों पर भाषा का अतिरिक्त बोझ डालना सही नहीं है। अदालत ने इसे एकेडमिक स्थिरता और लॉजिस्टिकल सुविधा के नजरिए से देखा है।\n\n### कब तक पूरी होगी प्रक्रिया?\n\nइस फैसले के साथ ही अब पूरी पॉलिसी, जिसमें 10वीं बोर्ड एग्जाम की अनिवार्यता भी शामिल है, उसका फुल इंटीग्रेशन अब 2031 तक खिंच गया है। अदालत ने सरकार को सुझाव दिया है कि मौजूदा बैच के लिए इसे वैकल्पिक रखा जाए और अनिवार्य नियम 2027 से नए सत्र में आने वाले छात्रों पर लागू हो।\n\n### एजुकेशन सेक्टर पर असर\n\nयह फैसला पब्लिशर्स, करिकुलम डेवलपर्स और स्कूल नेटवर्क्स के लिए काफी अहम है। अब कंपनियों और संस्थानों को अपने टेक्स्ट बुक्स और टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम्स को नए सिरे से तैयार करने के लिए 2027 तक का लंबा समय मिल गया है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने केंद्र का पक्ष रखते हुए इसे तुरंत लागू करने की वकालत की थी, लेकिन कोर्ट ने छात्रों के हितों को प्राथमिकता देते हुए इसे टालने का निर्देश दिया।
