सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि भर्ती प्रक्रिया में व्यक्तिगत पहचान के बजाय केवल मेरिट को आधार बनाया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने हाल ही में प्रयागराज स्थित उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) का दौरा किया। यह पहला मौका है जब सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान जज ने राज्य की इस महत्वपूर्ण भर्ती संस्था का आधिकारिक दौरा किया है। अपने संबोधन में उन्होंने साफ किया कि आयोग को प्रभावी शासन की नींव के रूप में काम करना चाहिए, जहां चयन का एकमात्र पैमाना उम्मीदवार की योग्यता होनी चाहिए।
जस्टिस नाथ ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया केवल एक प्रशासनिक काम नहीं, बल्कि देश के भविष्य में किया गया एक बड़ा निवेश है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 के तहत प्रदत्त संवैधानिक जनादेशों का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया ताकि संस्थाएं बाहरी दबावों से मुक्त होकर निष्पक्ष रूप से काम कर सकें।
निवेशकों और बिजनेस जगत के लिए इसके मायने
कारोबारी और निवेशकों के नजरिए से देखें, तो प्रशासनिक संस्थाओं की कार्यक्षमता आर्थिक स्थिरता का एक बड़ा संकेतक होती है। एक पारदर्शी और मेरिट-आधारित चयन प्रक्रिया प्रशासनिक बाधाओं को कम करती है, जो सीधे तौर पर 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और दीर्घकालिक आर्थिक योजनाओं को प्रभावित करती है। जब सरकारी संस्थाएं पूरी पारदर्शिता के साथ काम करती हैं, तो इससे सिस्टम में भरोसा बढ़ता है।
UPPSC के चेयरमैन संजय सिन्हा ने इस अवसर पर कहा कि सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखने में न्यायिक और प्रशासनिक संस्थाओं की संयुक्त जिम्मेदारी है। इस दौरे के दौरान नई साइट इंफ्रास्ट्रक्चर और एक म्यूजियम का भी उद्घाटन किया गया, जो आयोग के आधुनिकीकरण के प्रयासों को दर्शाता है। अब मार्केट ऑब्जर्वर्स की नजर इस बात पर है कि ये गवर्नेंस संबंधी निर्देश आगे चलकर भर्ती के तरीकों में क्या ठोस बदलाव लाते हैं।
