Supreme Court का कड़ा रुख: CAPF कैडर रिव्यू में देरी पर MHA से मांगी फाइलें

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Supreme Court का कड़ा रुख: CAPF कैडर रिव्यू में देरी पर MHA से मांगी फाइलें

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को आदेश दिया है कि वह Central Armed Police Forces (CAPF) के कैडर रिव्यू में देरी से जुड़ी फाइलें पेश करे। सरकार पर आरोप है कि उसने कोर्ट की डेडलाइन को नजरअंदाज किया और IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति (deputation) को प्राथमिकता दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने Central Armed Police Forces (CAPF) में कैडर रिव्यू को लेकर जारी विवाद पर गृह मंत्रालय की निगरानी बढ़ा दी है। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वे ओरिजिनल दस्तावेज पेश करें, ताकि यह जांचा जा सके कि क्या कोर्ट द्वारा मई 2025 में दिए गए 6 महीने के समय के भीतर वैधानिक प्रस्ताव दाखिल किए गए थे या नहीं। यह कदम CAPF अधिकारियों द्वारा दायर अवमानना याचिका का हिस्सा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सरकार ने न्यायिक आदेशों का पालन नहीं किया है।

सीनियर लीडरशिप और कानूनी घमासान

इस कानूनी लड़ाई की मुख्य वजह CAPF के वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की नियुक्ति है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, मई 2025 के फैसले के बाद से 63 IPS अधिकारियों को फोर्स में तैनात किया गया है, जिनमें 32 डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल और 27 इंस्पेक्टर जनरल शामिल हैं। कोर्ट ने पहले ही वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड तक इन प्रतिनियुक्ति पदों को चरणबद्ध तरीके से कम करने का निर्देश दिया था, जिसे कर्मचारी वर्ग रुका हुआ मान रहा है। हालांकि, सरकार ने इन फैसलों को 'सद्भावनापूर्ण' बताया है, लेकिन कोर्ट ने प्रशासनिक बाधाओं से बचने के लिए फिलहाल मौजूदा डेप्युटेशन पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

नए कानून का असर

'Central Armed Police Forces (General Administration) Act, 2026' के लागू होने से स्थिति और जटिल हो गई है। जहां सरकार का तर्क है कि यह कानून भर्ती और सेवा शर्तों का ढांचा प्रदान करता है, वहीं याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह स्वतंत्र कैडर रिव्यू की अनिवार्यता को खत्म नहीं करता। यह कानून इंस्पेक्टर जनरल के 50% और एडिशनल डायरेक्टर जनरल के 67% पदों पर IPS प्रतिनियुक्ति के कोटे को औपचारिक रूप देता है, जो करियर अधिकारियों के प्रमोशन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित है, जिसमें कोर्ट मंत्रालय की फाइलों की समीक्षा करेगा और सरकार द्वारा अतिरिक्त समय मांगे जाने के अनुरोध पर विचार करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.