नतीजों पर IND-AS का बड़ा असर
Royal Orchid Hotels (ROH) ने Q3 FY26 के लिए अपने नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में जोरदार वृद्धि तो दिखी, लेकिन मुनाफे (Profit) में खास कमी आई। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 24.3% बढ़कर ₹117.9 करोड़ दर्ज किया गया। वहीं, क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर (QoQ) के आधार पर भी रेवेन्यू 35.9% बढ़कर ₹117.9 करोड़ रहा। EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) में भी 13.8% की अच्छी बढ़ोतरी हुई और यह ₹34.8 करोड़ रहा। EBITDA मार्जिन 29.5% पर मजबूत बना हुआ है।
मुनाफ़ा क्यों घटा? जानें वजह
इसके विपरीत, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में बड़ी गिरावट देखी गई। कंसोलिडेटेड PAT में 52.9% की सालाना (YoY) गिरावट आई और यह ₹7.7 करोड़ पर आ गया। प्रति शेयर आय (EPS) में भी 49.3% की कमी आई, जो ₹3.3 रही। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह गिरावट मुख्य रूप से नए इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स (IND-AS) को अपनाने के कारण है। IND-AS के तहत डेप्रिसिएशन (मूल्यह्रास) और फाइनेंस कॉस्ट (वित्त लागत) में 'नोटेशनल' यानी कागज़ी तौर पर बढ़ोतरी हुई है, जिसने Q3 FY26 के लिए कंसोलिडेटेड PAT को ₹6.42 करोड़ और 9 महीने (9M) FY26 के लिए ₹12.58 करोड़ तक कम कर दिया।
9 महीने (9M) FY26 के लिए, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 14.6% बढ़कर ₹287.5 करोड़ रहा, जबकि PAT 30.4% गिरकर ₹22.1 करोड़ पर आ गया।
Standalone बेसिस पर देखें तो, Q3 FY26 में रेवेन्यू 3.4% बढ़कर ₹59.8 करोड़ हुआ, लेकिन EBITDA में 6.3% की मामूली गिरावट आई और यह ₹16.7 करोड़ रहा। PAT भी 15.3% घटकर ₹6.7 करोड़ रहा।
बैलेंस शीट पर IND-AS का असर
IND-AS के कारण कंपनी की बैलेंस शीट में बड़े बदलाव दिखे हैं। कंसोलिडेटेड एसेट्स (संपत्तियों) में भारी उछाल आया, जो FY25 के ₹538.2 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹1,026.8 करोड़ हो गए। इसका मुख्य कारण Right-of-Use Assets का बढ़ना है (₹104.6 करोड़ से ₹561.9 करोड़)। इसी के साथ, कंसोलिडेटेड लीज लायबिलिटीज (लीज देनदारियां) भी ₹121.3 करोड़ (FY25) से बढ़कर ₹554 करोड़ (FY26) हो गईं। इन बदलावों के चलते, कुल कर्ज (बोरिंग्स + लीज लायबिलिटीज) FY25 के ₹221.3 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹655.5 करोड़ हो गया। वहीं, कैश और कैश इक्विवेलेंट्स FY25 के ₹26.7 करोड़ से घटकर FY26 में ₹15.6 करोड़ रह गए।
'विजन 2030' और एसेट-लाइट मॉडल
आगे देखते हुए, Royal Orchid Hotels ने 'Vision 2030' नाम से एक महत्वाकांक्षी योजना पेश की है। इसके तहत कंपनी का लक्ष्य FY30 तक 345 से अधिक होटल और 22,000 से अधिक कीज़ (कमरे) संचालित करना है। इस रणनीति का मुख्य हिस्सा 'एसेट-लाइट' मॉडल की ओर एक मजबूत झुकाव है, जिसमें मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स और फ्रेंचाइजिंग पर ज़ोर दिया जाएगा। कंपनी 'Iconiqa' जैसे नए लाइफस्टाइल ब्रांड्स भी लॉन्च करने की योजना बना रही है और 25% से अधिक ROCE (कैपिटल एम्प्लॉयड पर रिटर्न) का लक्ष्य रखा है। यह योजना हॉस्पिटैलिटी प्रोफेशनल्स को ट्रेनिंग देकर युवाओं को सशक्त बनाने पर भी केंद्रित है।
सेक्टर की चाल और कंपनी का भविष्य
भारतीय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर महामारी के बाद मजबूत रिकवरी दिखा रहा है, जिसमें बड़े खिलाड़ी जैसे IHCL और ITC Hotels ने अच्छे नतीजों की रिपोर्टिंग की है। ROH जहां विस्तार और एसेट-लाइट मॉडल पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, वहीं कई प्रतिस्पर्धियों ने भी ऑक्यूपेंसी रेट्स और एवरेज रूम रेट्स में सुधार देखा है, जिससे मुनाफे में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। ROH के PAT में गिरावट, सेक्टर की समग्र तेजी के विपरीत, अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स के प्रभाव को उजागर करती है, जिस पर निवेशक बारीकी से नज़र रखेंगे।
आगे की राह और चुनौतियां
Royal Orchid Hotels के लिए तत्काल चुनौती अपनी आक्रामक विस्तार योजनाओं को लाभदायक विकास में बदलना होगा। IND-AS के कारण हुए कर्ज और लीज देनदारियों में भारी वृद्धि को कुशलता से प्रबंधित करने की आवश्यकता होगी। निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि कंपनी अपनी एसेट-लाइट रणनीति को कितनी प्रभावी ढंग से लागू करती है और लाभप्रदता बनाए रखते हुए नई प्रॉपर्टीज़ को एकीकृत करती है। कंपनी की महत्वाकांक्षी Vision 2030 के लक्ष्यों को हासिल करने की क्षमता महत्वपूर्ण साबित होगी।