भारत में टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी खबर! विदेश के रिटायरमेंट अकाउंट्स का करना होगा खुलासा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
भारत में टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी खबर! विदेश के रिटायरमेंट अकाउंट्स का करना होगा खुलासा

अगर आप भारत में Resident and Ordinarily Resident (ROR) टैक्सपेयर हैं, तो आपके लिए एक जरूरी खबर है। आपको विदेश में मौजूद अपने रिटायरमेंट अकाउंट्स, जैसे 401(k)s, की जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में देनी होगी, भले ही उनसे कोई कमाई न हुई हो। गलत ITR फॉर्म भरने पर आपका रिटर्न डिफेक्टिव माना जा सकता है।

विदेश के रिटायरमेंट अकाउंट्स का खुलासा क्यों जरूरी?

बहुत से भारतीय टैक्सपेयर्स, खासकर जिन्होंने विदेश में काम किया है, उनके पास अमेरिका के 401(k) या Individual Retirement Accounts (IRA) जैसे रिटायरमेंट अकाउंट्स हो सकते हैं। भारत में Resident and Ordinarily Resident (ROR) माने जाने वाले टैक्सपेयर्स के लिए यह एक अहम नियम है कि उन्हें इन विदेशी संपत्तियों का अपनी सालाना इनकम टैक्स रिटर्न में खुलासा करना अनिवार्य है। यह तब भी जरूरी है जब इन अकाउंट्स से कोई ब्याज, डिविडेंड या कैपिटल गेन (Capital Gain) न मिला हो।

आयकर अधिनियम, 1961 के तहत, विदेशी रिटायरमेंट अकाउंट्स को 'रिपोर्टेबल फॉरेन एसेट्स' (Reportable Foreign Assets) की श्रेणी में रखा गया है। टैक्स डिपार्टमेंट विदेशी संपत्तियों पर नजर रखने के लिए इन सभी का पूरा ब्योरा मांगता है। चूंकि ये अकाउंट्स भारत के बाहर हैं, इसलिए इनकी जानकारी देना आय की स्थिति पर निर्भर नहीं करता। अगर अकाउंट पूरे वित्तीय वर्ष (Financial Year) में इस्तेमाल भी नहीं हुआ है, तब भी इसका जिक्र न करना नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।

सही ITR फॉर्म चुनना -

टैक्सपेयर्स अक्सर ITR-1 (सहज) जैसे आसान फॉर्म भरने की गलती करते हैं। यह फॉर्म उन लोगों के लिए है जिनकी आय के स्रोत सीमित हैं और यह विदेशी संपत्ति रखने वालों के लिए बिल्कुल भी मान्य नहीं है। अगर आपके पास विदेश का रिटायरमेंट अकाउंट है, तो ITR-1 भरना गलत होगा।

इसके बजाय, आपको वह फॉर्म चुनना होगा जिसमें विदेशी संपत्तियों की जानकारी देने का प्रावधान हो। यदि आपकी आय केवल सैलरी, हाउस प्रॉपर्टी या ब्याज जैसी चीजों से आती है, तो आमतौर पर ITR-2 सही विकल्प है। वहीं, अगर आपकी आय किसी बिजनेस या पेशे से जुड़ी है, तो आपको ITR-3 फाइल करना होगा।

गलत ITR फॉर्म भरने का खतरा -

गलत ITR फॉर्म भरने पर एक खास रेगुलेटरी जोखिम (Regulatory Risk) होता है। आयकर अधिनियम की धारा 139(9) के तहत, गलत फॉर्म पर भरा गया इनकम टैक्स रिटर्न 'डिफेक्टिव' (Defective) माना जा सकता है। जब ऐसा होता है, तो टैक्स डिपार्टमेंट आपको नोटिस भेजता है और आपको गलती सुधारने के लिए एक निश्चित समय-सीमा में सही रिटर्न फाइल करना होता है।

अगर आप इस नोटिस को नजरअंदाज करते हैं या तय समय में सुधार नहीं करते, तो आपका रिटर्न वैसे ही माना जाएगा जैसे कभी फाइल ही नहीं हुआ। इससे पेनल्टी (Penalty) लग सकती है या कुछ टैक्स लाभ (Tax Benefits) से आप वंचित रह सकते हैं।

इसलिए, अपना रिटर्न फाइनल करने से पहले अपनी विदेशी संपत्तियों की जांच जरूर करें। अगर आपको इस बारे में कोई शंका है कि कोई विदेशी अकाउंट रिपोर्टेबल फॉरेन एसेट है या नहीं, तो किसी टैक्स प्रोफेशनल (Tax Professional) से सलाह लेना सबसे अच्छा रहेगा। टैक्सपेयर्स के लिए सबसे अहम बात यह सुनिश्चित करना है कि सही फॉर्म में Schedule FA (Foreign Assets) को ठीक से भरा गया हो और सभी विदेशी पेंशन या रिटायरमेंट से जुड़े अकाउंट्स का सही-सही खुलासा किया गया हो।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.