ITR फाइलिंग: विदेशी आय और संपत्ति की रिपोर्टिंग के अहम नियम, AY 2026-27

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
ITR फाइलिंग: विदेशी आय और संपत्ति की रिपोर्टिंग के अहम नियम, AY 2026-27

आकलन वर्ष (AY) 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय, करदाताओं को अपनी विदेशी आय और विदेशी संपत्ति की सही-सही जानकारी देना बहुत ज़रूरी है, ताकि टैक्स नोटिस से बचा जा सके। रिपोर्टिंग की ज़रूरतें आपकी आवासीय स्थिति (Residential Status) पर निर्भर करती हैं, जिसमें ROR (Resident and Ordinarily Resident) व्यक्तियों के लिए सबसे कड़े वैश्विक आय प्रकटीकरण नियम लागू होते हैं। Schedule FA में जानकारी न देना या टैक्स क्रेडिट के लिए Form 67 फाइल न करना आम गलतियाँ हैं, जिनसे जुर्माना लग सकता है।

विदेशी आय और संपत्ति की रिपोर्टिंग: AY 2026-27 के लिए अहम नियम

जैसे-जैसे आकलन वर्ष (AY) 2026-27 के लिए ITR फाइलिंग का सीज़न आगे बढ़ रहा है, वैश्विक वित्तीय हितों वाले व्यक्तियों को अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में इसका खुलासा करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आयकर विभाग विभिन्न माध्यमों से विदेशी संपत्ति और आय पर नज़र रखता है, और गलत रिपोर्टिंग से जांच शुरू हो सकती है या 'ब्लैक मनी (Undisclosed Foreign Income and Assets) and Imposition of Tax Act, 2015' के तहत जुर्माना लग सकता है।

आपकी आवासीय स्थिति और प्रकटीकरण की ज़िम्मेदारियाँ

आपकी रिपोर्टिंग की ज़िम्मेदारी मुख्य रूप से आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 6 के तहत आपकी आवासीय स्थिति (Residential Status) द्वारा तय होती है। रेजिडेंट एंड ऑर्डिनरीली रेजिडेंट (ROR) के रूप में वर्गीकृत व्यक्तियों को अपनी विश्वव्यापी आय घोषित करनी होती है। इसमें विदेशी बैंक खातों, विदेशी निवेशों और विदेश में रोज़गार से होने वाली आय शामिल है। इसके विपरीत, नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) को आम तौर पर केवल उसी आय की रिपोर्ट करनी होती है जो भारत में अर्जित या प्राप्त हुई हो। रेजिडेंट बट नॉट ऑर्डिनरीली रेजिडेंट (RNOR) एक विशेष मध्यवर्ती स्थिति में आते हैं, जहाँ उन्हें आमतौर पर केवल उन्हीं विदेशी आय पर कर देना होता है जो भारत के भीतर नियंत्रित व्यापार या व्यावसायिक कनेक्शन से उत्पन्न होती है।

विदेशी टैक्स क्रेडिट और Schedule FA का प्रबंधन

करदाताओं के लिए एक आम चुनौती Schedule FA (Foreign Assets) और Schedule FSI (Foreign Source Income) का सही उपयोग है। Schedule FA के तहत, विदेशी बैंक खातों, वित्तीय हितों और अचल संपत्तियों सहित सभी विदेशी संपत्तियों का खुलासा करना अनिवार्य है, भले ही वे वित्तीय वर्ष के दौरान केवल थोड़े समय के लिए ही क्यों न रखी गई हों। एक आम चूक निष्क्रिय विदेशी बैंक खातों को रिपोर्ट न करना है, जिन्हें घोषित किया जाना चाहिए।

जब किसी विदेशी देश में पहले ही टैक्स चुकाया जा चुका हो, तो करदाता 'डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट' (DTAA) या धारा 91 के तहत राहत का दावा कर सकते हैं। फॉरेन टैक्स क्रेडिट (FTC) का दावा करने के लिए, करदाताओं को Form 67 फाइल करना होगा। इस फॉर्म को ITR जमा करने से पहले फाइल करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि देरी या फाइल न करने पर टैक्स विभाग क्रेडिट देने से इनकार कर सकता है, जिससे भारत में आपकी कर देनदारी बढ़ सकती है।

सामान्य अनुपालन की खामियाँ

फॉर्म छूटने के अलावा, करदाताओं को अक्सर मुद्रा रूपांतरण (Currency Conversion) के साथ समस्याएँ आती हैं। सभी विदेशी आय को आयकर नियमों द्वारा निर्दिष्ट विनिमय दर, आमतौर पर टेलीग्राफिक ट्रांसफर बाइंग रेट, का उपयोग करके भारतीय रुपये में परिवर्तित किया जाना चाहिए। गलत दर का उपयोग करने या दर के असंगत स्रोत से विसंगतियाँ हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त, कई करदाता गलती से ITR-1 या ITR-2 जैसे सरलीकृत फॉर्म भर देते हैं, जबकि उनकी स्थिति के लिए ITR-3 या ITR-4 जैसे अधिक व्यापक फॉर्म की आवश्यकता होती है, जिनमें विदेशी आय और संपत्तियों के लिए आवश्यक शेड्यूल शामिल होते हैं।

निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने दावों को सत्यापित करने के लिए विदेशी टैक्स स्टेटमेंट और बैंक प्रमाणपत्रों सहित सभी सहायक दस्तावेज़ तैयार रखें। यदि आवासीय स्थिति की गणना जटिल है, तो भविष्य में आयकर नोटिस से बचने के लिए त्रुटियों से बचने हेतु किसी टैक्स पेशेवर से सलाह लेना अक्सर अनुशंसित होता है।

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