Reliance Industries का बड़ा कीर्तिमान
Reliance Industries Limited (RIL) ने कॉर्पोरेट जगत में एक नया इतिहास लिख दिया है। कंपनी $120 अरब डॉलर का सालाना रेवेन्यू पार करने वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए RIL ने $124 अरब डॉलर का रेवेन्यू दर्ज किया है। चेयरमैन मुकेश अंबानी के नेतृत्व में यह एक बड़ी उपलब्धि है। इस शानदार रेवेन्यू के साथ, कंपनी का EBITDA $21.9 अरब डॉलर और नेट प्रॉफिट $10.1 अरब डॉलर रहा। यह नेट प्रॉफिट का आंकड़ा भी किसी भारतीय कंपनी के लिए पहला है। RIL ने भारत की टॉप तीन IT कंपनियों - TCS, Infosys और HCL Technologies - के संयुक्त मुनाफे को भी पीछे छोड़ दिया है।
ग्रोथ के मुख्य कारण और मार्केट में पोजीशन
RIL का यह विस्तार उसके विविध बिज़नेस ऑपरेशन्स का नतीजा है। कंपनी के डिजिटल वेंचर 'Jio' के EBITDA में सबस्क्राइबर्स की बढ़त और 5G व फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेवाओं के चलते साल-दर-साल 18% की वृद्धि देखी गई। Reliance Retail का रेवेन्यू 8% बढ़ा, जिसने हाइपरलोकल कॉमर्स में अपनी पैठ मजबूत की। ऑयल टू केमिकल्स (O2C) सेगमेंट ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों और बाजार की उठापटक के बावजूद 10% EBITDA ग्रोथ हासिल की।
21 मई 2026 तक, Reliance Industries (RELI) के शेयर लगभग ₹1,354.50 पर ट्रेड कर रहे थे, और कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹18.33 ट्रिलियन था। कंपनी का P/E रेश्यो 22.39 है, जो पिछले 10 सालों के औसत के करीब और ऑयल एंड गैस इंडस्ट्री के औसत से ऊपर है। दूसरी ओर, Bharti Airtel और Infosys जैसी कंपनियों का वैल्यूएशन मल्टीपल अलग है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भविष्य की राह
धिरुभाई अंबानी द्वारा 60 साल पहले एक टेक्सटाइल ट्रेडिंग बिज़नेस के रूप में शुरू की गई इस कंपनी को मुकेश अंबानी ने एक ग्लोबल कांग्लोमेरेट में बदल दिया है। $124 अरब डॉलर के रेवेन्यू के साथ, RIL एशिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार है और मार्केट कैप व रेवेन्यू के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी पब्लिक कंपनी है। कंपनी अपने डिजिटल और रिटेल सेक्टर्स में ज़बरदस्त ग्रोथ के लिए तैयार है। इसके अलावा, Reliance की नई ऊर्जा परियोजनाएं, जैसे ग्रीन हाइड्रोजन और सोलर मैन्युफैक्चरिंग, कंपनी के लिए चौथा बड़ा ग्रोथ पिलर बनने की ओर अग्रसर हैं।
संभावित जोखिम और चिंताएं
अपनी सफलताओं के बावजूद, Reliance Industries को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है। कुछ रिपोर्ट्स में राजनीतिक भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, धोखाधड़ी, वित्तीय हेरफेर और ग्राहकों व प्राकृतिक संसाधनों के शोषण के आरोप लगे हैं। रेगुलेटरी फाइलिंग्स में इनसाइडर ट्रेडिंग की भी खबरें हैं। हाल ही में एक शेयरहोल्डर मीटिंग में, एक प्रस्ताव पारित नहीं हुआ जिसमें डायरेक्टर्स को बहुमत वोट हासिल करने में विफल होने के नौ महीने के भीतर बोर्ड से इस्तीफा देने की आवश्यकता होती, जो संभावित गवर्नेंस चिंताओं को दर्शाता है। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 0.44 है, जो एक मध्यम स्तर का लीवरेज दिखाता है।
