Reliance Industries समर्थित Vantara फैसिलिटी पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ गया है। ग्लोबल कंजर्वेशन समूहों ने पारदर्शिता की चिंताओं के चलते वन्यजीवों के आयात पर स्थायी रोक लगाने की मांग की है, जो नवंबर 2026 की CITES मीटिंग से पहले बड़ी चुनौती है।
जामनगर स्थित Vantara फैसिलिटी अब वैश्विक स्तर पर जांच के घेरे में है। 27 अंतरराष्ट्रीय कंजर्वेशन संगठनों के एक गठबंधन ने आधिकारिक तौर पर मांग की है कि यहां वन्यजीवों का आयात हमेशा के लिए बंद किया जाए। हालांकि फैसिलिटी ने हाल ही में 12 महीने के लिए नए आयात पर रोक लगाने की घोषणा की थी, लेकिन Pro Wildlife के नेतृत्व में इन समूहों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है।
CITES मीटिंग और रेगुलेटरी स्क्रूटनी
यह दबाव इसलिए भी अहम है क्योंकि नवंबर 2026 में जिनेवा में CITES की 81वीं स्टैंडिंग कमिटी की बैठक होने वाली है। इस दौरान 2025 के वेरिफिकेशन मिशन पर भारत सरकार के जवाब की समीक्षा होगी। एक्टिविस्ट्स इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या तपा नुली ओरंगुटान (Tapanuli orangutan) जैसी संरक्षित प्रजातियों का मूवमेंट अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस के मुताबिक था।
ऑपरेशंस और पारदर्शिता पर सवाल
Vantara का विस्तार बेहद तेजी से हुआ है। पिछले 4 सालों में यहां 2,000 प्रजातियों के 60,000 जानवरों को रखा गया है। आलोचकों का कहना है कि इस बड़े पैमाने पर काम करने के लिए स्वतंत्र ऑडिट और पूरी इन्वेंट्री की पारदर्शिता जरूरी है। उनकी मांग है कि कंपनी बड़े पैमाने पर जानवरों के अधिग्रहण के बजाय स्थानीय आवास संरक्षण (Habitat Conservation) पर ध्यान दे।
निवेशकों के लिए जोखिम
निवेशकों के नजरिए से, इस तरह के हाई-प्रोफाइल कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी प्रोजेक्ट्स में रेपुटेशनल और गवर्नेंस रिस्क अहम होते हैं। CITES की आगामी बैठक में आने वाले परिणाम फैसिलिटी की फ्यूचर स्ट्रैटेजी और पब्लिक स्टैंडिंग पर सीधा असर डाल सकते हैं, जिस पर बाजार की पैनी नजर है।
