India Refurbished Market: नए फोन को छोड़ा पीछे! प्री-ओन्ड इलेक्ट्रॉनिक्स की डिमांड में आई बंपर तेजी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India Refurbished Market: नए फोन को छोड़ा पीछे! प्री-ओन्ड इलेक्ट्रॉनिक्स की डिमांड में आई बंपर तेजी

भारत में नए स्मार्टफोन और लैपटॉप की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसका सीधा असर रिफर्बिश्ड (pre-owned) इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट पर पड़ रहा है। अनुमान है कि 2026 तक यह बाजार **12%** की जोरदार ग्रोथ दर्ज करेगा। बढ़ती लागत और महंगाई के चलते ग्राहक अब नए डिवाइस की जगह सर्टिफाइड प्री-ओन्ड (certified pre-owned) इलेक्ट्रॉनिक्स की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। इस ट्रेंड को देखते हुए Samsung जैसी बड़ी कंपनियां भी अपने सेकेंडरी मार्केट प्रोग्राम का विस्तार कर रही हैं।

क्यों बढ़ रही है प्री-ओन्ड डिवाइसेस की मांग?

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जहां एक ओर नए डिवाइसेस की बिक्री धीमी पड़ रही है, वहीं रिफर्बिश्ड डिवाइसेस का बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है। लगातार महंगाई और कॉम्पोनेंट की बढ़ती लागत के चलते, लोग प्रीमियम कीमत वाले नए मॉडल्स की जगह सर्टिफाइड प्री-ओन्ड स्मार्टफोन और लैपटॉप को प्राथमिकता दे रहे हैं।

हालिया इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में स्मार्टफोन्स की औसत बिक्री कीमत (Average Selling Price) पहली तिमाही में रिकॉर्ड $302 तक पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले 10.4% ज्यादा है। इसके बावजूद, नए स्मार्टफोन्स की शिपमेंट में 4.1% की गिरावट देखी गई। इस साल 85% से ज्यादा स्मार्टफोन मॉडल्स की कीमतें बढ़ी हैं, और नए लॉन्च हुए डिवाइसेस की कीमत पुराने मॉडल्स के मुकाबले 30% से 40% तक ज्यादा है। ऐसे में, रिफर्बिश्ड डिवाइसेस वैल्यू-कॉन्शियस (value-conscious) भारतीय ग्राहकों के लिए एक बेहतर और किफायती विकल्प बनकर उभरे हैं।

2026 के लिए सेक्टर की उम्मीदें

मार्केट की भविष्यवाणियां इस ट्रेंड को और मजबूत करती हैं। Counterpoint Research का अनुमान है कि 2026 तक रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन सेगमेंट में 12% की सालाना ग्रोथ देखने को मिलेगी, जबकि इसी दौरान नए स्मार्टफोन शिपमेंट्स में 11% की गिरावट आ सकती है। लैपटॉप मार्केट का हाल भी कुछ ऐसा ही है। Omdia के अनुमान के मुताबिक, 2026 तक भारत में नए लैपटॉप की कुल शिपमेंट घटकर 14.3 मिलियन यूनिट्स रह सकती है, जो 2025 में 15.8 मिलियन यूनिट्स थी। ऑफिशियल रिफर्बिश्ड प्रोग्राम्स पर बढ़ रहे भरोसे और वारंटी की सुविधा के कारण, यह सेकेंडरी मार्केट अब घरों और बजट-सेंसिटिव खरीदारों के लिए एक मुख्यधारा का विकल्प बनता जा रहा है।

कंपनियों की रणनीति में बदलाव

ग्राहकों के बदलते व्यवहार को समझते हुए, प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां अपने बिजनेस स्ट्रैटेजी में रिफर्बिश्ड प्रोडक्ट्स को शामिल कर रही हैं। उदाहरण के लिए, Samsung ने इसी साल मई में भारत में अपने ऑफिशियल सर्टिफाइड रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन प्रोग्राम का विस्तार किया। यह कदम दर्शाता है कि मैन्युफैक्चरर्स अब सेकेंडरी मार्केट को नजरअंदाज नहीं कर रहे, बल्कि यूजर लॉयल्टी बनाए रखने के लिए इसमें अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये ब्रांड्स अपने नए प्रोडक्ट की बिक्री को नुकसान पहुंचाए बिना अपने रिफर्बिश्ड डिवीजन्स को कितनी प्रभावी ढंग से बढ़ा पाते हैं। इस ग्रोथ की स्थिरता, रिफर्बिशमेंट के लिए हाई-क्वालिटी कॉम्पोनेंट्स की उपलब्धता और नए तथा सर्टिफाइड प्री-ओन्ड डिवाइसेस के बीच कीमतों का अंतर बने रहने पर निर्भर करेगी।

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