SBSP नेता Om Prakash Rajbhar ने दावा किया है कि केंद्र सरकार जातिगत जनगणना के बाद Uttar Pradesh को **4** अलग-अलग राज्यों में बांटने पर विचार कर रही है। हालांकि अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन प्रशासनिक बदलाव की संभावना निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष Om Prakash Rajbhar ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi जातिगत जनगणना के बाद Uttar Pradesh को 4 राज्यों में बांटने की योजना बना रहे हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दल के इस बयान ने देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य के पुनर्गठन की पुरानी बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। फिलहाल, केंद्र सरकार की ओर से इस प्रशासनिक बदलाव पर कोई आधिकारिक पुष्टि या कैबिनेट मंजूरी नहीं मिली है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
25 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले राज्य का विभाजन होने पर प्रशासनिक स्तर पर बड़े सवाल खड़े होते हैं। ऐतिहासिक रूप से, ऐसे बड़े बदलावों से रेगुलेटरी अप्रूवल, जमीन अधिग्रहण की नीतियों, टैक्स और लेबर कानूनों में अनिश्चितता पैदा होती है। निवेशक अक्सर अपनी लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिरता को प्राथमिकता देते हैं।
पुराना इतिहास और चुनौतियां
वर्ष 2000 में Uttar Pradesh से अलग होकर Uttarakhand का गठन हुआ था, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं और संसाधनों के बंटवारे में एक ट्रांजिशन फेज देखा गया था। अगर भविष्य में दोबारा ऐसा होता है, तो राज्य की सीमाओं के भीतर काम कर रहे व्यवसायों को अपने मौजूदा लाइसेंस, इंसेंटिव पैकेज और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) कॉन्ट्रैक्ट्स का पुनर्मूल्यांकन करना होगा।
राजनीतिक बनाम व्यावसायिक नजरिया
Purvanchal, Paschim Pradesh, Awadh Pradesh और Bundelkhand के रूप में राज्य को चार भागों में बांटने का प्रस्ताव पिछले 2 दशकों से राजनीतिक घोषणापत्रों का हिस्सा रहा है। हालांकि, बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक संसद में कोई औपचारिक बिल पेश नहीं किया जाता, तब तक इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी ही माना जाना चाहिए। वर्तमान में, व्यवसायों को केवल वर्तमान रेगुलेटरी माहौल और संभावित नीतिगत बदलावों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
