Rajasthan School Entry Rules: CJP के कैम्पेन के बाद सरकार सख्त, अब स्कूल में घुसने से पहले लेनी होगी इजाज़त

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Rajasthan School Entry Rules: CJP के कैम्पेन के बाद सरकार सख्त, अब स्कूल में घुसने से पहले लेनी होगी इजाज़त

राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के लिए पहले लिखित अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है। साथ ही, अनधिकृत फोटोग्राफी और रिकॉर्डिंग पर भी रोक लगा दी गई है। यह फैसला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा शुरू किए गए स्कूल निरीक्षण अभियान के बाद आया है। विपक्षी नेताओं ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि यह सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर जनता की निगरानी को रोकने की कोशिश है।

सरकारी स्कूलों में अब कड़ी निगरानी

राजस्थान सरकार ने तुरंत प्रभाव से सरकारी स्कूलों के अंदर अनधिकृत प्रवेश, फोटोग्राफी और रिकॉर्डिंग पर कड़ा प्रतिबंध लगाने का निर्देश जारी किया है। 16 अगस्त, 2026 को जारी किए गए एक सर्कुलर के अनुसार, सभी गैर-सरकारी आगंतुकों को स्कूल के प्रिंसिपल से पहले लिखित मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा, उन्हें क्लासरूम और लैबोरेटरी जैसे संवेदनशील इलाकों में स्टाफ के साथ ही जाने की इजाज़त होगी।

नए नियमों के तहत, आगंतुकों को अपने विज़िट का आधिकारिक लॉग रखना होगा। सरकार ने इस कदम को 'इन लोको पैरेंटिस' के सिद्धांत, यानी स्कूलों की अभिभावक की जगह लेने की कानूनी ज़िम्मेदारी, के साथ-साथ राष्ट्रीय संरक्षण निकायों द्वारा जारी बाल सुरक्षा और निजता दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए उचित ठहराया है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों की गरिमा की रक्षा करना और छात्र गतिविधियों या क्लासरूम की अनधिकृत रिकॉर्डिंग को रोकना है।

CJP के अभियान का असर?

यह प्रशासनिक बदलाव मई 2026 में स्थापित युवा-नेतृत्व वाले सामाजिक और राजनीतिक दबाव समूह, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा घोषित 'स्कूल ठीक करो' अभियान के बाद आया है। CJP ने जयपुर, जोधपुर, अजमेर और कोटा सहित कई जिलों के सरकारी स्कूलों का स्वतंत्र निरीक्षण करने की योजना का ऐलान किया था। CJP का लक्ष्य सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की उपलब्धता में कथित कमियों को उजागर करना था, जो मुद्दे सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में हैं।

विपक्षी दलों का विरोध

सरकार के इस फैसले का राजनीतिक विपक्ष ने कड़ा विरोध किया है। राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली और अन्य आलोचकों ने इस प्रतिबंध को एक रक्षात्मक कदम बताया है। उनका आरोप है कि यह राज्य की शिक्षा प्रणाली में मौजूद सिस्टमैटिक इंफ्रास्ट्रक्चर की खामियों को छिपाने का एक प्रयास है। आलोचकों का कहना है कि यह आदेश सरकारी स्कूलों पर जनता और कार्यकर्ताओं की निगरानी को प्रभावी ढंग से बाधित करता है।

आगे की राह

ऑपरेशनल तौर पर, इस निर्देश से स्कूल प्रिंसिपलों पर नया प्रशासनिक बोझ आ गया है, जिन्हें अब सभी आगंतुक अनुरोधों की जांच करनी होगी और संभावित टकरावों को संभालना होगा। जहां सरकार सीखने के माहौल की सुरक्षा पर जोर दे रही है, वहीं यह टकराव प्रशासनिक नियंत्रण और सार्वजनिक शैक्षणिक सुविधाओं की स्थिति में पारदर्शिता की मांग के बीच बढ़ती खाई को उजागर करता है। इस नीति का परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि इन नियमों को कितनी सख्ती से लागू किया जाता है, बनाम कार्यकर्ता समूहों के अपने निरीक्षण प्रयासों को जारी रखने के इरादे पर।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.