राजस्थान के प्रतापगढ़ में अवैध माइनिंग माफियाओं को रोकने के दौरान एक फॉरेस्ट रेंजर की जान चली गई। यह घटना राज्य के माइनिंग सेक्टर में गवर्नेंस और ऑपरेशनल रिस्क को उजागर करती है, जिस पर निवेशकों की नजरें टिकी हैं।
घटना सोमवार देर रात प्रतापगढ़ जिले के छोटी सादड़ी फॉरेस्ट एरिया की है। फॉरेस्ट रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत अवैध माइनिंग में लगी गाड़ियों को रोकने की कोशिश कर रहे थे, तभी एक डंपर ट्रक ने उन्हें कुचल दिया। ड्राइवर मौके से फरार हो गया और पुलिस इसे माइनिंग सिंडिकेट द्वारा किया गया एक सुनियोजित हमला मानकर जांच कर रही है। डीएफओ सुरेश चंद्र अग्रवाल ने पुष्टि की है कि मामले में अन्य मशीनरी तो जब्त कर ली गई है, लेकिन मुख्य वाहन अभी भी फरार है।
माइनिंग सेक्टर के लिए क्या हैं खतरे?
राजस्थान भारत में मिनरल एक्सट्रैक्शन का एक बड़ा हब है। इस तरह की हिंसक घटनाओं के बाद राज्य सरकारें अक्सर 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाती हैं। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में माइनिंग परमिट्स की गहन ऑडिट, सख्त चेकिंग और पेट्रोलिंग बढ़ाई जा सकती है। सूचीबद्ध (listed) कंपनियों के लिए इसका सीधा असर ऑपरेशनल डिसरप्शन और Compliance Costs बढ़ने के रूप में सामने आता है।
ESG और निवेशकों पर असर
ESG (Environmental, Social, and Governance) के नजरिए से यह घटना एक बड़ी चेतावनी है। संस्थागत निवेशक (Institutional Investors) उन इलाकों में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर कड़ी नजर रखते हैं जहां कंपनियों के बड़े एसेट्स होते हैं। स्थानीय स्तर पर अगर सुरक्षा बिगड़ती है, तो इसका असर सीधे कंपनी की रेपुटेशन और कामकाज की व्यावहारिकता पर पड़ता है।
अगले कुछ हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार मिनरल ट्रांसपोर्ट और लीज एनफोर्समेंट को लेकर क्या नई गाइडलाइंस जारी करती है। यदि सरकार माइनिंग गतिविधियों पर लंबा 'क्रैम्पडाउन' लगाती है, तो स्थानीय सप्लाई चेन और माइनिंग कंपनियों के प्रोडक्शन शेड्यूल पर इसका बुरा असर पड़ना तय है।
