राजस्थान के भरतपुर और डीग जिलों में हुए निकाय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों ने इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र में कुल 415 वार्डों में से 262 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है, जो कि **63.1%** का स्ट्राइक रेट है।
राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों के नतीजे राजनीतिक पंडितों को हैरान कर रहे हैं। भरतपुर और डीग में निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा इतना रहा कि उन्होंने 415 में से 262 वार्डों पर जीत का परचम लहरा दिया। यह जीत न केवल बड़ी है, बल्कि राज्य की मुख्यधारा की राजनीति के लिए एक बड़े संदेश के रूप में देखी जा रही है।
बड़े दलों का क्या रहा हाल?
जहाँ भरतपुर और डीग में निर्दलीय भारी पड़े, वहीं राज्य के अन्य हिस्सों में स्थिति अलग रही। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा जैसे बड़े नगर निगमों में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। वहीं, कांग्रेस पार्टी ने बीकानेर में अपना दबदबा बरकरार रखते हुए बहुमत प्राप्त किया है।
अब आगे क्या?
चूंकि निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए अब मेयर और चेयरमैन पद के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई है। बोर्ड गठन के लिए BJP और कांग्रेस दोनों ही इन निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में लाने की कोशिश करेंगे। मेयर और चेयरमैन का चुनाव 21 और 22 सितंबर को होना है, जो शहर के विकास कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े फैसलों की दिशा तय करेगा।
यह चुनाव हालांकि राज्य स्तर की विधानसभा सीटों पर सीधा असर नहीं डालते, लेकिन स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हवा का रुख समझने के लिए इन नतीजों को अहम माना जा रहा है।
