विपक्षी नेता Rahul Gandhi ने PM Narendra Modi को सार्वजनिक बहस (Public Debate) की चुनौती दी है। यह कदम गुजरात में पीएम द्वारा विपक्ष को 'बाधा डालने वाली ताकत' करार देने के बाद उठाया गया है, जिससे देश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।
2 नवंबर, 2026 को विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने PM Narendra Modi को देश के प्रशासन में विदेशी प्रभाव की भूमिका पर एक खुली बहस के लिए आमंत्रित किया है। यह चुनौती गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री के संबोधन के जवाब में आई है।
पीएम मोदी का हमला और विपक्ष का जवाब
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में विपक्ष को 'बाधा डालने वाली ताकत' बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समूह वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए साजिश रच रहा है। पीएम ने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों के गलत इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया। वहीं, Rahul Gandhi ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि सरकार खुद विदेशी हितों पर निर्भर है। उन्होंने आरोप लगाया कि घरेलू वित्तीय प्रणालियों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर वैश्विक संस्थाओं का असर बढ़ा है, जो सत्ता को बनाए रखने में मदद करती हैं।
राजनीतिक तनाव और राष्ट्रीय संप्रभुता
यह विवाद अब भारतीय राजनीति में बाहरी कारकों की भूमिका को लेकर गहरा गया है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर राष्ट्रीय संप्रभुता और संवैधानिक अखंडता को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। जहाँ प्रधानमंत्री का जोर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं पर है, वहीं विपक्ष सरकार की विदेशी निर्भरता को कटघरे में खड़ा कर रहा है।
आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस खुली बहस की चुनौती को स्वीकार करती है या फिर सोशल मीडिया के जरिए जुबानी जंग जारी रहती है, जो देश के राजनीतिक माहौल को और गरमा सकती है।
