डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने Radico Khaitan के ठिकानों पर छापेमारी की है। यह जांच बल्क स्कॉच इंपोर्ट के वर्गीकरण में गड़बड़ी और कम इंपोर्ट ड्यूटी का फायदा उठाने के आरोपों से जुड़ी है, जो कंपनी के मुनाफे पर असर डाल सकती है।
DRI ने उत्तर प्रदेश स्थित Radico Khaitan के कॉर्पोरेट ऑफिस और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई उस बड़ी सरकारी जांच का हिस्सा है, जिसके तहत यह पता लगाया जा रहा है कि शराब कंपनियां बल्क स्कॉच कंसंट्रेट्स को कैसे क्लासिफाई करती हैं। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि क्या ये इंपोर्ट 75% टैरिफ के दायरे में आते हैं या इन पर कस्टम नियमों के तहत 150% ड्यूटी लगनी चाहिए।\n\nपूरा विवाद जुलाई 2026 में लागू हुए भारत-यूके ट्रेड एग्रीमेंट की व्याख्या से जुड़ा है। सरकार यह जांच रही है कि क्या कंपनियां फिनिश्ड प्रोडक्ट्स के लिए तय कम टैक्स स्लैब का फायदा उठाने के लिए जानबूझकर गलत क्लासिफिकेशन कर रही थीं। अगर ये आरोप साबित होते हैं, तो बड़ी लिकर कंपनियों के लिए बड़ा टैक्स विवाद खड़ा हो सकता है।\n\nहालाँकि, Radico Khaitan ने स्पष्ट किया है कि इन छापों का उनके फाइनेंशियल या ऑपरेशनल कामकाज पर कोई मटेरियल असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह मुद्दा पूरी शराब इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी रेगुलेटरी चुनौती बनकर उभरा है। इस जांच के दायरे में Pernod Ricard और Diageo जैसे ग्लोबल दिग्गज भी शामिल हैं, जो भारतीय बाजार में प्रीमियम ब्रांड्स बनाने के लिए स्कॉच कंसंट्रेट्स का इस्तेमाल करते हैं।\n\nइंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने वाणिज्य मंत्रालय के पास अपनी चिंता जताई है कि इस तरह की सख्ती से मार्केट में अनिश्चितता पैदा हो रही है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क टैक्स का बोझ है। अगर सरकार ऊंचे रेट पर टैक्स वसूलने का फैसला लेती है, तो कंपनियों के मार्जिन पर भारी दबाव आ सकता है। अभी निवेशकों को DRI और मंत्रालय की अगली अपडेट्स पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि कोई भी टैक्स डिमांड नोटिस कंपनी के शेयरों के लिए रिस्क बढ़ा सकता है।
