RSS से जुड़े विचारक T.G. Mohandas को 9 अगस्त 2026 को तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने हिरासत में लिया। उन पर NEET परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। पुलिस उनके डिजिटल चैनलों की सामग्री की जांच कर रही है।
T.G. Mohandas हिरासत में
केरल के जाने-माने राजनीतिक टिप्पणीकार और लेखक T.G. Mohandas को रविवार, 9 अगस्त 2026 को कोच्चि स्थित उनके आवास से तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई उनकी YouTube चैनल 'पत्रिका' पर की गई टिप्पणियों के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत के बाद हुई है। ये टिप्पणियां कथित तौर पर दिल्ली में NEET प्रश्न पत्र लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के संबंध में थीं।
क्या है विवाद?
विवाद इस आरोप के इर्द-गििर्द घूमता है कि Mohandas ने प्रदर्शनकारियों के बारे में अपमानजनक बयान दिए। पुलिस के अनुसार, इन टिप्पणियों में कथित तौर पर यह दावा शामिल था कि प्रदर्शनकारी यौन हिंसा की ओर प्रवृत्त होते हैं। साथ ही, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोली चलाने जैसी घातक बल प्रयोग की धमकियों का भी जिक्र था। इन टिप्पणियों ने व्यापक जन आक्रोश पैदा किया और साइबर पुलिस इकाई द्वारा मामला दर्ज किया गया।
पुलिस की कार्रवाई
छापेमारी के दौरान, जांचकर्ताओं ने उनके आवास की तलाशी ली और डिजिटल उपकरणों को जब्त किया, जिनमें कथित तौर पर विवादास्पद सामग्री बनाने और अपलोड करने के लिए इस्तेमाल किए गए उपकरण शामिल हैं। यह जांच सार्वजनिक व्यवस्था पर इस तरह की बयानबाजी के प्रभाव को निर्धारित करने के कानूनी प्रयास का हिस्सा है। पुलिस वर्तमान में वीडियो और सामग्रियों की समीक्षा कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वे भय पैदा करने और सार्वजनिक शांति भंग करने से संबंधित कानूनों का उल्लंघन करते हैं।
T.G. Mohandas का परिचय
T.G. Mohandas केरल के राजनीतिक और बौद्धिक विमर्श में एक प्रमुख व्यक्ति हैं। प्रशिक्षित इंजीनियर और वकील के रूप में, उनके पास एक स्तंभकार और लेखक के रूप में एक लंबा इतिहास रहा है। वह पहले भारतीय विचार केंद्र से जुड़े थे और भाजपा की बौद्धिक प्रकोष्ठ के राज्य संयोजक के रूप में कार्य कर चुके हैं। उनका काम अक्सर राष्ट्रीय और राज्य की राजनीतिक प्रवृत्तियों पर टिप्पणी करता है।
आगे की जांच
टिप्पणियों से संबंधित कानूनी कार्यवाही जारी है। अगले कदमों में जब्त किए गए डिजिटल सबूतों का विस्तृत फोरेंसिक विश्लेषण और अभियोजन अधिकारियों द्वारा आगे की पूछताछ शामिल होने की संभावना है, ताकि अभद्र भाषा और उकसावे से संबंधित किसी भी कानूनी उल्लंघन की सीमा निर्धारित की जा सके।
