RSS प्रमुख मोहन भागवत ने देश की स्थिरता को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने पड़ोसी देशों में मची उथल-पुथल का हवाला देते हुए बाहरी ताकतों के सक्रिय होने की बात कही है। निवेशकों के लिए यह एक अहम संकेत है, क्योंकि लंबी अवधि के निवेश के लिए देश में राजनीतिक स्थिरता सबसे बड़ा फैक्टर होती है।
अस्थिरता का क्या असर?
नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि भारत में 'रेजीम चेंज' (Regime Change) करने की अंतरराष्ट्रीय साजिशें रची जा रही हैं। उन्होंने बांग्लादेश, नेपाल, फ्रांस और अल्बानिया में हालिया राजनीतिक उठा-पटक का उदाहरण देते हुए देश को सतर्क रहने की अपील की।
इकोनॉमी और स्टेबिलिटी का कनेक्शन
फाइनेंशियल मार्केट के नजरिए से देखें तो किसी भी देश की आर्थिक प्रगति उसकी राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता पर टिकी होती है। भागवत ने साफ किया कि भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत ने देश को बाहरी ताकतों का केंद्र बना दिया है।
इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Institutional Investors) हमेशा इस बात पर नजर रखते हैं कि देश की घरेलू नीतियां कितनी स्थिर हैं। एक शांत और स्थिर राजनीतिक वातावरण ही कॉरपोरेट्स को लॉन्ग-टर्म कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) करने का भरोसा देता है।
निवेशकों के लिए टेकअवे
भागवत का यह भाषण सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर देने वाले नैरेटिव से मेल खाता है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों से सरकार की प्राथमिकताओं और भविष्य की रेगुलेटरी दिशा का पता चलता है। जो निवेशक भारत में लंबी अवधि के लिए पैसा लगा रहे हैं, उनके लिए यह स्थिरता और स्पष्टता का एक बड़ा पैमाना है। आने वाले समय में सरकार की नीतियां इन सुरक्षा पहलुओं के साथ कितनी संतुलित रहती हैं, यह देखना बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा।
