भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों को बाजार में उतारने की तैयारी कर रहा है। सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद, RBI इन नोटों की ड्यूरेबिलिटी और सुरक्षा जांचने के लिए बड़े पैमाने पर फील्ड ट्रायल करने की योजना बना रहा है।
पॉलीमर नोटों की ओर RBI का कदम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब ₹10 और ₹20 के नए पॉलीमर बैंकनोट्स को पेश करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उम्मीद है कि FY28 की शुरुआत तक ये नोट चलन में आ सकते हैं। केंद्र सरकार ने केंद्रीय बैंक को इन नोटों के फील्ड ट्रायल करने की इजाजत दे दी है, ताकि भारतीय मौसम और इस्तेमाल के हिसाब से इनकी परफॉरमेंस जांची जा सके।
इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए, RBI 200 करोड़ (दो अरब) पॉलीमर नोट जारी करेगा, जिसमें ₹10 और ₹20 के नोटों की संख्या बराबर-बराबर होगी। इस ट्रायल का मुख्य मकसद मौजूदा कागजी नोटों की तुलना में पॉलीमर-आधारित करेंसी की लंबी अवधि की ड्यूरेबिलिटी (टिकाऊपन) और सुरक्षा का परीक्षण करना है। खासतौर पर कम मूल्य वाले नोटों की लाइफ बढ़ाना अहम है, क्योंकि ये ज्यादा चलन में रहते हैं और जल्दी खराब हो जाते हैं।
मैन्युफैक्चरिंग और आगे की राह
RBI की सहायक कंपनी, भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने जरूरी पॉलीमर सब्सट्रेट शीट की खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर जारी कर दिया है। यह इस पूरी प्रक्रिया का पहला और अहम कदम है। फिलहाल, भारत में करेंसी का उत्पादन मुख्य रूप से BRBNMPL और सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SPMCIL) जैसी सरकारी संस्थाओं के अधीन है।
यह समझना जरूरी है कि ये पॉलीमर नोट मौजूदा कागजी नोटों को तुरंत बदलने के बजाय, उनके साथ-साथ ही चलन में रहेंगे। अभी किसी भी लिस्टेड कंपनी पर इसका सीधा असर नहीं है, क्योंकि उत्पादन RBI के नियंत्रण वाली संस्थाएं ही करेंगी। हालांकि, भविष्य में यह करेंसी सप्लाई चेन में प्राइवेट प्लेयर्स के लिए अवसर पैदा कर सकता है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो खास सिक्योरिटी इंक, एडवांस सब्सट्रेट टेक्नोलॉजी या बेहतर सिक्योरिटी फीचर्स प्रदान करती हैं।
आगे क्या?
चूंकि यह प्रोजेक्ट अभी ट्रायल फेज में है, इसलिए लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग में कुछ चुनौतियाँ आ सकती हैं। RBI की इन फील्ड ट्रायल्स में सफलता ही भविष्य में दूसरे डिनॉमिनेशन के नोटों में पॉलीमर के इस्तेमाल का फैसला तय करेगी। निवेशक इन ट्रायल्स की प्रगति और भविष्य की खरीद अपडेट्स पर नजर रख सकते हैं, ताकि RBI की करेंसी इंफ्रास्ट्रक्चर को बदलने की लॉन्ग-टर्म योजना को समझा जा सके।
