RBI का बड़ा ऐलान: अब आएंगे प्लास्टिक वाले ₹10 और ₹20 के नोट, शुरू हुई टेंडर प्रक्रिया

OTHER
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
RBI का बड़ा ऐलान: अब आएंगे प्लास्टिक वाले ₹10 और ₹20 के नोट, शुरू हुई टेंडर प्रक्रिया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने करेंसी को और ज्यादा टिकाऊ और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बैंक जल्द ही ₹10 और ₹20 के पॉलीमर (प्लास्टिक) नोटों के फील्ड ट्रायल शुरू करने वाला है। उम्मीद है कि अगले फाइनेंशियल ईयर तक ये नोट बाजार में आ सकते हैं, जिससे पेपर करेंसी को बदलने का भारी खर्च कम होगा। BRBNMPL ने इसके लिए जरूरी मटेरियल के लिए ग्लोबल टेंडर भी मंगा लिए हैं।

क्यों आ रहे हैं प्लास्टिक के नोट?

RBI का यह कदम करेंसी नोटों की लाइफ बढ़ाने के लिए उठाया जा रहा है। पॉलीमर नोट, जो बायएक्शियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन (BOPP) नामक प्लास्टिक फिल्म से बने होते हैं, पारंपरिक पेपर नोटों की तुलना में 2.5 से 4 गुना ज्यादा चलते हैं। ये नमी, पानी और रोजमर्रा के इस्तेमाल से होने वाली टूट-फूट के प्रति ज्यादा रेसिस्टेंट होते हैं। साथ ही, इनमें ट्रांसपेरेंट विंडो जैसी एडवांस्ड एंटी-काउंटरफिटिंग (नकली नोटों को रोकने वाली) सुविधाएं भी शामिल की जा सकती हैं, जिन्हें कॉपी करना मुश्किल होता है।

टेंडर प्रक्रिया और लागत

इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने स्पेशल पॉलीमर सब्सट्रेट शीट की खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर मंगाए हैं। इच्छुक सप्लायर्स 18 अगस्त, 2026 तक अपने बिड जमा कर सकते हैं। यह टेंडर प्रक्रिया प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता (feasibility) का पता लगाने की दिशा में पहला अहम कदम है।

हालांकि, पॉलीमर नोटों के फायदे तो हैं, लेकिन इनके प्रोडक्शन में ज्यादा खर्च आता है। अनुमान है कि पॉलीमर नोटों की छपाई की लागत पारंपरिक पेपर करेंसी की तुलना में 30% से 60% तक ज्यादा हो सकती है। सेंट्रल बैंक के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन शुरुआती उत्पादन लागतों और नोटों को बार-बार बदलने से होने वाली लंबी अवधि की बचत के बीच संतुलन बनाना होगा।

पिछली कोशिशें और चुनौतियाँ

भारत में पॉलीमर करेंसी को लेकर पहले भी कोशिशें हुई हैं। पिछले 15 सालों में ऐसे कई प्रयास हुए, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण उन्हें रोक दिया गया था। पिछली चुनौतियों में इंक का उखड़ना, ATM मशीनों के साथ कम्पैटिबिलिटी की समस्या और भारत की अलग-अलग और अक्सर एक्सट्रीम जलवायु परिस्थितियों (जैसे हाई ह्यूमिडिटी और गर्मी) में मटेरियल के परफॉरमेंस को लेकर चिंताएं शामिल थीं।

इसलिए, मौजूदा फील्ड ट्रायल बहुत जरूरी हैं। इस प्रोजेक्ट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ट्रायल फेज के दौरान ये नए नोट असल दुनिया की परिस्थितियों में कैसा प्रदर्शन करते हैं। फिलहाल, मौजूदा पेपर करेंसी चलन में बनी रहेगी, क्योंकि RBI तुरंत पुराने स्टॉक को बदलने की योजना नहीं बना रहा है। इस प्रोजेक्ट पर अगली बड़ी अपडेट टेंडर प्रक्रिया के नतीजे और शुरुआती फील्ड टेस्ट के रिजल्ट्स से मिलेगी, जिससे पता चलेगा कि इस प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.