भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक के नोटों को चलाने की तैयारी कर ली है। सरकार की मंजूरी के बाद, RBI इन नए पॉलीमर नोटों के स्थायित्व (durability) की जांच के लिए फील्ड ट्रायल (field trial) शुरू करेगा। इसका मकसद कागजी नोटों की तुलना में इनकी मजबूती जांचना और छपाई की लागत को कम करना है।
Detailed Coverage
क्यों आ रहे हैं प्लास्टिक के नोट?
RBI के अनुसार, प्लास्टिक के नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में कहीं ज़्यादा टिकाऊ होते हैं। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों से पता चला है कि ये नोट जल्दी खराब नहीं होते, जिससे इन्हें बार-बार छापने की ज़रूरत नहीं पड़ती। इससे लंबी अवधि में छपाई की लागत में कमी आएगी और खराब नोटों का कचरा भी कम होगा।
फील्ड ट्रायल और खरीद
इन नोटों के ट्रायल के लिए, RBI की सहायक कंपनी Bharatiya Reserve Bank Note Mudran (P) Ltd (BRBNMPL) ने पॉलीमर सब्सट्रेट (polymer substrate) की ग्लोबल खरीद के लिए टेंडर जारी किया है। इसमें ₹10 और ₹20 के नोटों के लिए 68,000 रीम (ream) BOPP-आधारित सब्सट्रेट की ज़रूरत होगी। सप्लायर्स को कुल मात्रा का कम से कम 30% सप्लाई करना होगा। यह शुरुआती खरीद सिर्फ टेस्टिंग के लिए है, और ट्रायल के नतीजों के आधार पर ही आगे की योजना बनेगी।
डिजिटल पेमेंट पर क्या होगा असर?
RBI ने साफ किया है कि प्लास्टिक के नोटों का मकसद कागजी नोटों को बदलना नहीं है, और न ही ये डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने की राह में रोड़ा बनेंगे। ये नोट मौजूदा पेमेंट सिस्टम के साथ मिलकर काम करेंगे। निवेशकों और बाजार के लिए, यह कदम एक ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) से जुड़ा है, न कि बैंकिंग या फाइनेंसियल सेक्टर को प्रभावित करने वाली कोई बड़ी पॉलिसी। इन नोटों की सफलता जनता की स्वीकार्यता और फील्ड ट्रायल के नतीजों पर निर्भर करेगी।
