QS Asia Rankings 2027: भारत की यूनिवर्सिटीज की संख्या बढ़ी, लेकिन टॉप संस्थानों की रैंकिंग में फिसलन

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
QS Asia Rankings 2027: भारत की यूनिवर्सिटीज की संख्या बढ़ी, लेकिन टॉप संस्थानों की रैंकिंग में फिसलन

QS Asia Rankings 2027 में भारत का दबदबा बढ़ा है और अब कुल **325** संस्थान सूची में शामिल हैं, जो एशिया में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। हालांकि, चिंता की बात यह है कि **71%** भारतीय यूनिवर्सिटीज की रैंकिंग में गिरावट आई है, जो ग्लोबल एकेडमिक क्वालिटी के सामने कड़ी चुनौती पेश कर रही है।

QS World University Rankings: Asia 2027 की रिपोर्ट ने भारतीय उच्च शिक्षा के विस्तार की तस्वीर साफ कर दी है। देश के 325 संस्थान अब इस लिस्ट का हिस्सा हैं, जिसमें 34 नए नाम जुड़े हैं। लेकिन संख्या में इस बढ़त का दूसरा पहलू निराशाजनक है; रैंकिंग में शामिल 71% भारतीय संस्थानों की स्थिति पिछली बार के मुकाबले खराब हुई है।

टॉप संस्थानों का हाल

भारत के दिग्गज संस्थानों की बात करें तो, IIT दिल्ली देश का सबसे ऊंचे पायदान पर रहने वाला संस्थान है, जो फिसलकर 66वें स्थान पर आ गया है। IISc बैंगलोर अब 79वें और IIT बॉम्बे 83वें स्थान पर है। वहीं, दिल्ली यूनिवर्सिटी टॉप 100 की सूची से बाहर होकर 106वें नंबर पर पहुंच गई है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये संस्थान सार्वजनिक या नॉन-प्रॉफिट बॉडीज हैं और शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं हैं, इसलिए यह बदलाव केवल रिसर्च और एकेडमिक क्वालिटी को दर्शाते हैं।

रिसर्च का विरोधाभास

भारत का प्रदर्शन 'आउटपुट वॉल्यूम' और 'ग्लोबल इन्फ्लुएंस' के बीच एक अजीब अंतर दिखाता है। भारत के 5 संस्थान 'पेपर्स पर फैकल्टी' के मामले में एशिया के टॉप 10 में हैं। साथ ही, 15 संस्थानों ने पीएचडी क्वालिफाइड फैकल्टी के मामले में पहला स्थान साझा किया है। हालांकि, चुनौती यह है कि इस रिसर्च का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम है। 'सिटेशन पर पेपर' की कैटेगरी में केवल 3 भारतीय संस्थान ही टॉप 50 में जगह बना पाए हैं।

एम्प्लॉयमेंट में अभी भी दबदबा

गिरावट के बावजूद, भारतीय संस्थानों का 'एम्प्लॉयर रेपुटेशन' के मामले में लोहा माना जाता है। IIT बॉम्बे और IIT दिल्ली अभी भी इस कैटेगरी में एशिया के टॉप 10 में बने हुए हैं, जो यह साबित करता है कि इंडस्ट्री में भारतीय ग्रेजुएट्स की मांग अब भी जबरदस्त है। आने वाले समय में नई शिक्षा नीति (National Education Policy 2020) के जरिए शिक्षण संस्थानों को रिसर्च कोलैबोरेशन और ग्लोबल इंटीग्रेशन पर और तेजी से ध्यान देना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.