PwC India और PwC US ने अपनी कंसल्टिंग और एक्सेलेरेशन सेंटर ऑपरेशंस को मिलाकर एक नई **$2 बिलियन** की जॉइंट वेंचर कंपनी बनाने का फैसला किया है। इस नई इकाई में **40,000** कर्मचारी होंगे और इसका मुख्य फोकस ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) मार्केट पर होगा।
स्ट्रक्चर और लीडरशिप
इस रणनीतिक साझेदारी के तहत, PwC US की 50.1% हिस्सेदारी होगी, लेकिन ऑपरेशनल कंट्रोल पूरी तरह से PwC India के हाथों में रहेगा। कंपनी के चेयरपर्सन संजीव कृष्ण इस नई इकाई के सीईओ के रूप में कमान संभालेंगे। यह वेंचर मुख्य रूप से मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजी और रिस्क कंसल्टिंग पर ध्यान केंद्रित करेगा, ताकि मल्टीनेशनल क्लाइंट्स को बेहतर सेवाएं दी जा सकें।
क्यों लिया गया यह फैसला?
भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) का तेजी से विस्तार हो रहा है। इस बड़े मर्जर का उद्देश्य ग्लोबल कंसल्टिंग मैंडेट्स और स्थानीय स्तर पर तकनीकी निष्पादन (technical execution) के बीच के अंतर को कम करना है। हालांकि, ध्यान रहे कि PwC India का ऑडिट, टैक्स और सरकारी सलाहकार विभाग इस विलय का हिस्सा नहीं हैं और वे पहले की तरह स्वतंत्र रूप से काम करना जारी रखेंगे।
रेगुलेटरी अप्रूवल का इंतजार
फिलहाल इस डील को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India - CCI) की मंजूरी का इंतजार है। मार्केट जानकारों की नजर इस बात पर टिकी है कि रेगुलेटर इस स्ट्रक्चर को लेकर क्या शर्तें रखता है, क्योंकि इसी के आधार पर कंपनी अपने ऑपरेशंस को पूरी तरह शुरू कर पाएगी। यह कदम कंसल्टिंग सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सर्विस क्वालिटी को मेंटेन रखने की एक बड़ी कवायद माना जा रहा है।
