पंजाब के मानसा में ड्रग्स विरोधी एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या के बाद राज्य में राजनीतिक तनाव गहरा गया है। विपक्ष ने सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर कड़े सवाल उठाए हैं, जिससे राज्य के कारोबारी माहौल पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या के बाद राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान को घेरे में लेते हुए कानून-व्यवस्था की विफलता का आरोप लगाया है।\n\nमानसा में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। पीड़ित परिवार ने न्याय की मांग करते हुए तब तक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है जब तक कि मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी, जैसे CBI, से नहीं कराई जाती। प्रदर्शनकारी स्थानीय प्रशासन पर भरोसा जताने से परहेज कर रहे हैं और मुख्य संदिग्ध के हथियारों के लाइसेंस पर भी सवाल उठा रहे हैं।\n\nबठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ड्रग्स के बढ़ते नेटवर्क और अपराधियों पर लगाम न लगा पाने के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। इसके अलावा, पुलिस महानिदेशक (DGP) के कार्यकाल जैसे प्रशासनिक मुद्दों को भी सुरक्षा तंत्र की खामियों के रूप में देखा जा रहा है।\n\nनिवेशकों और बाजार के जानकारों की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी हैं। किसी भी राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और राजनीतिक स्थिरता वहां के बिजनेस क्लाइमेट के लिए महत्वपूर्ण होती है। उच्च-प्रोफाइल मामलों में प्रशासन का रुख और जांच की गति यह तय करेगी कि राज्य में शासन की कुशलता को लेकर बाजार का नजरिया कैसा रहता है।
