पंजाब के फ़िरोज़पुर में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान हेल्थ डिपार्टमेंट की झांकी में बुजुर्गों को घुटने की सर्जरी के मरीज़ बताकर पेश किया गया, जो अब सियासी विवाद का रूप ले चुका है। सच्चाई सामने आने पर पता चला कि ये लोग मरीज़ नहीं, बल्कि रिटायर कर्मचारी थे। विपक्ष इस वाकये को झूठा प्रचार बता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि यह 'मुख मंत्री सेहत बीमा योजना' के प्रचार का एक प्रतीकात्मक तरीका था।
झांकी में क्या था और हुआ क्या?
15 अगस्त, 2026 को फ़िरोज़पुर में आयोजित राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में पंजाब सरकार की हेल्थ डिपार्टमेंट की एक झांकी चर्चा का विषय बन गई। इस झांकी में कुछ बुजुर्गों को भंगड़ा करते हुए दिखाया गया था। अनाउंसर ने दावा किया कि ये लोग 'मुख मंत्री सेहत बीमा योजना' (MMSY) के तहत घुटने की सर्जरी करवा चुके मरीज़ हैं।
हकीकत आई सामने, मचा बवाल
कार्यक्रम के तुरंत बाद यह बात सामने आई कि झांकी में दिख रहे लोग असल मरीज़ नहीं, बल्कि हेल्थ डिपार्टमेंट के रिटायर कर्मचारी थे। इनमें से कम से कम एक व्यक्ति ने खुद कहा कि उन्होंने ऐसी कोई सर्जरी नहीं करवाई है। इस खुलासे के बाद कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल जैसी विपक्षी पार्टियों ने आम आदमी पार्टी सरकार पर थियेटर करने और अपनी स्वास्थ्य योजनाओं के असर के बारे में जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।
सरकार का पक्ष: 'यह सिर्फ एक प्रतीक था'
पंजाब सरकार और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि यह प्रदर्शन असली मरीज़ों का सीधा चित्रण नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक प्रस्तुति थी। अधिकारियों का तर्क था कि झांकी का मकसद MMSY के बारे में जागरूकता फैलाना था, जिसके तहत ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज मुहैया कराया जाता है। सरकार ने यह भी बताया कि इस योजना के तहत अब तक 12,153 घुटने की सर्जरी हो चुकी हैं, जिनमें से 9,971 सर्जरी खास तौर पर MMSY के तहत की गई हैं।
शासन और पारदर्शिता का सवाल
यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि सरकारी योजनाओं का प्रचार करने के लिए मंचित प्रदर्शनों में क्या जोखिम हो सकते हैं। भले ही सरकार का इरादा जनता को महंगे इलाज की उपलब्धता के बारे में सूचित करना था, लेकिन असली लाभार्थियों की जगह कलाकारों का इस्तेमाल सरकारी प्रचार कार्यक्रमों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर सकता है। इस घटना से उत्पन्न हुए सियासी तनाव के चलते वर्तमान प्रशासन को अपनी संचार रणनीतियों पर कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ रहा है।
