पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चेतावनी दी है कि सत्ता बदलने पर विपक्षी दल फ्री बिजली और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा जैसी कल्याणकारी योजनाओं को बंद कर सकते हैं। इसके अलावा, किशाऊ मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट में पंजाब को शामिल न किए जाने का मुद्दा भी गर्मा गया है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की इस चेतावनी ने राज्य के राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मान का कहना है कि अगर सत्ता में बदलाव होता है, तो वर्तमान में चल रही जन-कल्याणकारी स्कीम्स पर तलवार लटक सकती है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा संकेत है, क्योंकि राज्य की फिस्कल प्लानिंग में इन सब्सिडीज का बहुत बड़ा हिस्सा होता है।
फिस्कल हेल्थ पर असर
राज्य के मौजूदा बिजली सब्सिडी प्रोग्राम की वजह से ज्यादातर घरों के बिजली बिल शून्य आ रहे हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सब्सिडी पर भारी निर्भरता राज्य के डेट (Debt) लेवल और क्रेडिट रेटिंग पर असर डाल सकती है। राज्य के फिस्कल डेफिसिट पर नज़र रखना अब जरूरी हो गया है ताकि आर्थिक स्थिरता का सही अंदाजा लगाया जा सके।
किशाऊ प्रोजेक्ट और जल विवाद
टोंस नदी पर बन रहे किशाऊ मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट में पंजाब को बाहर रखने पर भी सीएम ने कड़ा रुख अपनाया है। यह एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है जिसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली शामिल हैं। ऐसे जल विवाद अक्सर कानूनी पेचीदगियों में फंस जाते हैं, जिससे सिंचाई और बिजली उत्पादन से जुड़ी योजनाओं में देरी होने का रिस्क बना रहता है।
सरकार की आगे की रणनीति
अपनी विकास नीति के तहत सरकार ने हाल ही में Goindwal Sahib थर्मल पावर प्लांट का अधिग्रहण किया है और नहरों के पानी के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया है। हालांकि, अब निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में अंतर-राज्यीय जल समझौतों और सरकारी नीतियों में क्या बदलाव आते हैं, क्योंकि यही चीजें पंजाब के बिजनेस लैंडस्केप को आकार देंगी।
