पंजाब के मानसा में 13 अक्टूबर को एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह की हत्या के बाद राज्य में राजनीतिक तनाव और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) के दखल ने इस मामले को बिजनेस और इन्वेस्टमेंट सेंटीमेंट के लिहाज से संवेदनशील बना दिया है।
सुरक्षा और स्थिरता पर सवाल
पंजाब के मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह (उर्फ झोटा) की गोली मारकर हत्या की घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर तीखी बहस छेड़ दी है। यह घटना 13 अक्टूबर, 2026 को एक मेडिकल स्टोर मालिक के साथ अवैध नशीली दवाओं के व्यापार को लेकर हुए विवाद के दौरान हुई। इस वारदात के वीडियो ने न केवल जनता में रोष पैदा किया है, बल्कि राज्य सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा
किसी भी राज्य में व्यापारिक स्थिरता के लिए 'लॉ एंड ऑर्डर' सबसे पहली शर्त होती है। बिजनेस लीडर्स और स्टेकहोल्डर्स सुरक्षा संबंधी ट्रेंड्स पर बारीक नजर रखते हैं, क्योंकि किसी भी प्रकार की अशांति स्थानीय ऑपरेशंस और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस को सीधा प्रभावित करती है। वर्तमान स्थिति को लेकर BJP, Congress और शिरोमणि अकाली दल जैसे प्रमुख राजनीतिक दल सरकार की सुरक्षा नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।
रेगुलेटरी हस्तक्षेप और जांच की मांग
नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को दो हफ्ते के भीतर एक्शन-टेकन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। वहीं, विपक्षी नेता स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भरोसा न जताते हुए इस मामले की CBI जांच की मांग कर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल पंजाब पुलिस ने मुख्य संदिग्ध के एक साथी को गिरफ्तार किया है और मुख्य आरोपी की तलाश जारी है। निवेशकों के लिए आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि सरकार किस तेजी से जांच पूरी करती है और सार्वजनिक विश्वास बहाल करने के लिए क्या कदम उठाती है। राज्य में शासन की स्थिरता और कानून का प्रभावी कार्यान्वयन ही पंजाब की 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की छवि को बचाए रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा।
