Rapido पर गिरी गाज: पुणे में अनधिकृत बाइक-टैक्सी सर्विस के खिलाफ दर्ज हुई FIR

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AuthorAditya Rao|Published at:
Rapido पर गिरी गाज: पुणे में अनधिकृत बाइक-टैक्सी सर्विस के खिलाफ दर्ज हुई FIR

पुणे पुलिस ने Rapido की पैरेंट कंपनी Roppen Transport के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है। कोर्ट द्वारा बैन के बावजूद कंपनी बिना परमिट के बाइक-टैक्सी चला रही थी, जो कंपनी के लिए एक बड़ी रेगुलेटरी मुसीबत बन गई है।

कानूनी शिकंजा और गंभीर आरोप

पुणे के विश्रांतवाड़ी पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले में कंपनी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(3) के तहत धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। साथ ही, मोटर व्हीकल एक्ट और आईटी एक्ट का उल्लंघन करने का भी मामला दर्ज हुआ है। यह कार्रवाई रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) की एक 'डिकॉय ऑपरेशन' के बाद हुई है। अधिकारियों ने 13 किलोमीटर की एक राइड बुक की, जिसका किराया ₹179 था। राइड पूरी होने पर जब अधिकारी ने जांच की, तो पता चला कि बाइक का रजिस्ट्रेशन 'नॉन-ट्रांसपोर्ट' कैटेगरी में है, जो नियमों का साफ उल्लंघन है।

लाइसेंस का पुराना विवाद

यह कोई पहला मौका नहीं है जब कंपनी कानूनी पचड़ों में फंसी है। दिसंबर 2022 में पुणे रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने कंपनी का एग्रीगेटर लाइसेंस आवेदन खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा, जहाँ दोनों अदालतों ने कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए सर्विस रोकने का निर्देश दिया था। अगस्त 2026 में कंपनी ने ई-बाइक एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए फिर आवेदन किया है, लेकिन आधिकारिक मंजूरी न मिलने से इनका ऑपरेशन फिलहाल अवैध बना हुआ है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

किसी भी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म के लिए रेगुलेटरी कंप्लायंस सबसे महत्वपूर्ण है। प्रशासनिक जुर्माने से आगे बढ़कर अब यह मामला आपराधिक कार्रवाई में तब्दील हो गया है, जो कंपनी के बिजनेस मॉडल और ऑपरेशनल निरंतरता (Business Continuity) के लिए बड़ा खतरा है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी इन लाइसेंसिंग मुद्दों को कैसे सुलझाती है, क्योंकि अनिश्चितता का यह माहौल शहर में कंपनी के विस्तार को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.