पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की 20 दिन से जारी भूख हड़ताल को खत्म करने की अपील की गई है। करीब **60** से ज़्यादा जानी-मानी हस्तियों, जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी भी शामिल हैं, ने वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उनसे यह हड़ताल खत्म करने का आग्रह किया है।
सेहत पर मंडराया खतरा, सहयोगियों की अपील
वांगचुक की भूख हड़ताल के लगभग तीन हफ़्ते बीत जाने के बाद उनकी शारीरिक स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अपील करने वाले 60 से अधिक प्रतिष्ठित व्यक्तियों, जिनमें शिक्षाविद, लेखक और फिल्म निर्माता शामिल हैं, ने कहा है कि वांगचुक देश की अंतरात्मा की आवाज़ हैं। उन्होंने वांगचुक से अपनी सेहत को प्राथमिकता देने और सरकार से उनकी मांगों पर बातचीत शुरू करने का आग्रह किया है।
चिकित्सीय रिपोर्टों के अनुसार, वांगचुक ने 9 किलोग्राम से ज़्यादा वज़न खो दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह अनशन जारी रहा तो मांसपेशियों में गंभीर क्षरण और अंगों को स्थायी नुकसान हो सकता है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा है कि वांगचुक के जनसेवा में योगदान अमूल्य हैं और उन्हें अपनी जान को इस तरह के जोखिम में नहीं डालना चाहिए।
प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता और सरकारी जवाबदेही
इस अपील का समर्थन करने वालों में नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी के साथ-साथ लेखक अरुंधति रॉय, अमिताव घोष और किरण देसाई भी शामिल हैं। ज़ोया अख्तर और विशाल भारद्वाज जैसे फिल्म निर्माताओं ने भी इस मुहिम का समर्थन किया है, जो विभिन्न बौद्धिक और रचनात्मक क्षेत्रों में वांगचुक की सुरक्षा के लिए व्यापक समर्थन को दर्शाता है।
वहीं, एक अलग मामले में, शिक्षा मंत्रालय की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिक्षाविदों के एक समूह, जिसमें रोमिला थापर और प्रभात पटनायक शामिल हैं, ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की चुप्पी की आलोचना की है। उनका कहना है कि छात्र भी अनशन पर बैठे हैं, और मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया न आने से ऐसी स्थिति में छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ किसी भी अनहोनी या नुकसान के लिए सरकार को जवाबदेह ठहराया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि छात्रों की शिकायतों को तुरंत दूर करने के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है।
