केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने GenZ के साथ सरकार के रिश्तों पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है। उन्होंने 'पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट' के बारे में बताया, जिसका मकसद पेपर लीक रोकना है। सरकार का कहना है कि यह कानून **2.25 लाख** से ज़्यादा लोगों से सलाह-मशविरे के बाद लाया गया है, ताकि छात्रों की चिंताओं को दूर किया जा सके।
'पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट' का पूरा प्लान
स्मृति ईरानी ने हाल ही में युवाओं से जुड़े सरकारी कदमों पर विस्तार से बात की। खास तौर पर, उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों पर ज़ोर दिया। चर्चा का मुख्य बिंदु 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट' का लागू होना है, जिसे परीक्षाओं में बार-बार होने वाली पेपर लीक और सुरक्षा से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने के लिए लाया गया है।
कानूनी ढाँचा और लोगों की राय
ईरानी ने साफ किया कि यह नया कानून जल्दबाजी में नहीं, बल्कि एक बड़ी और महत्वपूर्ण प्रक्रिया का नतीजा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में 2.25 लाख से भी ज़्यादा लोगों से राय ली गई। इनमें डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर, राज्य मंत्री, ग्राम शिक्षा परिषद, पेरेंट-टीचर एसोसिएशन और छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। इसका मकसद राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए एक सुरक्षित कानूनी ढाँचा तैयार करना है, ताकि अस्थायी समाधानों की जगह एक पक्की व्यवस्था बन सके।
छात्रों की चिंताओं पर सरकार की रणनीति
युवाओं और सरकार के बीच रिश्तों को लेकर, ईरानी ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के सीधे संवाद के तरीकों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए छात्रों से जुड़ने की कोशिश की जा रही है। सरकार का मानना है कि इन कोशिशों से यह पता चलता है कि वह युवा पीढ़ी की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए गंभीर है। साथ ही, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी बनाने वाली कमेटी में अलग-अलग विशेषज्ञों को शामिल करना भी देश के दीर्घकालिक शैक्षिक लक्ष्यों को आकार देने का एक उदाहरण है।
कानून-व्यवस्था बनाए रखना
हाल के छात्र विरोध प्रदर्शनों पर बोलते हुए, ईरानी ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ हिंसा के बीच अंतर स्पष्ट किया। प्रशासन ने ऐसी प्रदर्शनों में कथित आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के शामिल होने की खबरों पर चिंता जताई है। सरकार का कहना है कि जहाँ बहस और चर्चा ज़रूरी है, वहीं राज्य को आम जनता की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून का पालन करवाना होगा। इन प्रदर्शनों से जुड़ी असलियत का पता लगाने के लिए आधिकारिक जांच ही मुख्य जरिया है।
आगे क्या उम्मीद करें?
निवेशकों और आम जनता के लिए, इन शैक्षिक सुधारों का असर 'पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट' के प्रभावी कार्यान्वयन से पता चलेगा। मुख्य बातें यह होंगी कि परीक्षाओं से जुड़ी अनियमितताओं में कितनी कमी आती है, नए बनाए गए टास्क फोर्स कितने कारगर होते हैं, और जब ये नए नियम अलग-अलग राज्यों और राष्ट्रीय संस्थानों में लागू होते हैं तो शिक्षा क्षेत्र में कितनी स्थिरता आती है।
